भारतकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

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पृष्ठ 1080

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हेतुमद्भावे लिङर्थमपि न नञौ । विरक्तिमिति । येनाहमिति वाक्यार्थस्य व्यञ्जकत्वात् व्यञ्जनयोत्क्त्वा Wait, let's check: "हेतुमद्भावे लिङर्थमपि न नञौ । विरक्तिमिति । येनाहमिति वाक्यार्थस्य व्यञ्जकत्वात् व्यञ्जनयोत्क्त्वा" Wait, is it "व्यञ्जनयोत्क्त्वा" or "व्यञ्जनयोक्त्वा"? Look at: "व्यञ्जनयोत्क्त्वा" -> व + ्य + ञ + ् + ज + न + य + ा + ? Wait, "व्यञ्जनयोक्त्वा": Letters: व ्य ञ ् ज न य ो क ् त ्व ा ? Wait, look at: "व्यञ्जनयोक्त्वा" or "व्यञ्जनयोत्क्त्वा"? There is no 'त्', it is 'व्यञ्जनयोक्त्वा'! Wait, let's look at the letters: व ्य ञ ् ज न य ो (vyañjanayo-) then क ् त ्व ा (ktvā)! "व्यञ्जनयोक्त्वा" (having stated by