अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)
Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary
महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा
पृष्ठ 1499, कुल 2600 में से
संदर्भ में पढ़ें: in line 16, व्यपदेशः: the 'व्य' has a loop. In line 10, the letter after दिhas a 'व' loop, so it'sव्य! जीवस्योत्क्रान्त्यादिव्यपदेशो. Wait, is there an anusvara or 'न'? No, look at जीवस्योत्क्रान्त्यादिव्यपदेशो. It is clearly जीवस्योत्क्रान्त्यादिव्यपदेशो! Wait, look at स्वत उत्क्रान्त्यादिः: Yes, स्वत उत्क्रान्त्यादिः` (no visarga on स्वत, sandhi with उत्क्रान्त्यादिः or just missing visarga).
Let's check line 16:
मात्माद्युपाधिगुणसारत्वेन मायादिगुणव्यपदेशः 'सोऽकामयत, अणोरणीयान्, तत् सृष्ट्वा तदेवा-
Line 17:
नुप्राविशत्', 'प्राज्ञेनात्मनान्वारूढ उत्सर्जन्याति' इत्यादिः तद्वदित्यर्थः । तदेवञ्जीवस्य गमना-
Note: उत्सर्जन्याति - look at it: उत्सर्जन्याति or उत्सर्जद्याति?
In Brihadaranyaka 4.3.35:
"तद्यथाऽनः सुसमाहितमुत्सर्जद्यायादेवमेवायं शारीर आत्मा प्राज्ञ