भारतकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

पृष्ठ 384, कुल 2600 में से

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पृष्ठ 384

न्येव स्युर्यदि तत्तद्रूपं ब्रह्म तेषु तेषु न Wait, look at "नष्टान्येव": In line 3: न - ष्टा - न्ये - व. Yes, "नष्टान्येव".

Line 4: प्रविष्टं स्यात् । जीवस्य च ब्रह्मण्येव लयेन लीलारसानुभवेन नाश एव सः । Wait, "लीलारसानुभवेन" or "लीलारसाननुभवेन"? Look at line 4: "लीलारसानुभवेन" or "लीलारसाननुभवेन"? Wait, in line 11 it says: "लीलारसाननुभवे"! Let's look at line 4: ली - ला - र - सा - नु - भ - वे - न : There is only one 'न'! So "लीलारसानुभवेन" (meaning by dissolution in Brahman without experiencing lila-rasa, that would be mere destruction: "लयेन लीलारसानुभवेन [विना] नाश एव सः" or it's a typo in the original for लीलारसाननुभवेन, but line 4 has लीलारसानुभवेन). Wait, look closely: ली-ला-र-सा-नु-भ-वे-न. Yes, "लीलारसानुभवेन".

Line 5: तथाच तत्तद्रूपं ब्रह्म तेषु तेषु स्थितमिति न