भारतकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

पृष्ठ 428, कुल 2600 में से

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पृष्ठ 428

ाकाशद्वारा । श्लोकु संघाते ।] एतदिति आनन्दवह्लयां हि यतो वाचो निवर्तन्त इतिश्रुति-" Wait: "ब्रह्मवदाकाशद्वारा ।" Wait, after that: "श्लोकु संघाते ।]" -> close bracket! Notice on line 16 there is an open bracket: "[ सर्वात्मभावमित्यादि..." And line 20 has: "...श्लोकु संघाते ।]" Then: "एतदिति आनन्दवह्लयां हि यतो वाचो निवर्तन्त इतिश्रुति-" Wait, "आनन्दवह्लयां" or "आनन्दवल्ल्यां"? Look at the image: 'ह' with 'ल' inside: 'आनन्दवह्लयां' (common typographical ligature in old Indian prints for 'ल्ल' or 'ह्ल', but usually printed as 'ह्ल' for 'ल्ल' like 'वल्ली' -> 'वह्री' / 'वह्लि'). Let's see if it's 'आनन्दवल्ल्यां' or 'आनन्दवह्लयां': It has 'ह' with 'ल' below, or 'ल्ल'? It looks like 'आनन्दवल्ल्यां' or 'आनन्दवह्लयां'. Let's look at the letter: it's व + ह्ल + यां. Many Nirnayasagar prints use that type for 'ल्ल' or 'ह्ल'. Let's transcribe faithfully as 'आनन्दवल्ल्यां' or