भारतकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

पृष्ठ 947, कुल 2600 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 947

": व - ह्नि - व - न् - म - ह - त् - स्या - त् Yes, "वह्निवन्महत्स्यात्"!

Wait, look at the next sentence: "पृष्ठसंयोगस्तु तैनैष्यते ।" Wait, "तैनैष्यते" or "तैर्नेष्यते"? Look at L32: तै (tai) नै (nai) or र्ने (rne)? Wait, look at the top: Is there a repha? तै - र्ने - ष्य - ते : तैः + न + इष्यते = तैर्नेष्यते! Look at the repha above the second letter: Yes, there is an e-matra and a repha: 'र्ने'! So it is "तैर्नेष्यते" (tair neṣyate)! Not "तैनैष्यते"!

Wait, look at L33: "तमसंगतमिति प्रथमसूत्रेणोक्तम् । ततो द्वितीयसूत्रे परमाणुद्वयसंयोगः सार्वदैशिको बैकदेशिको" Wait, "बैकदेशिको" or "वैकदेशिको"? Letter is 'वै': "वैकदेशिको". Wait, let's look at the letter: is there a slash in the belly? In "वैकदेशिको", it's 'वै'.

Look at L34: "वा । नाद्यः । प्रदेशांगीकारे प्रदेशवत्त्वस्य