अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)
Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary
महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा
परिशिष्टविषयानुक्रमः ।
| विषयः | श्लोकाङ्कः | पत्राङ्कः | विषयः | श्लोकाङ्कः | पत्राङ्कः |
|---|---|---|---|---|---|
| प्रभुध्यानम् | १ | १ | हिन्दोलारोहणम् | १ | ५१ |
| देवीभाग्याभिनन्दनम् | २ | ३ | पवित्रोत्सवः | १-४ | ५१-५३ |
| अलौकिकज्ञानादि | ३ | ३ | रक्षाभावना | ५ | ५३ |
| भावस्वरूपध्यानम् | १५-२१ | ४-१४ | एवं प्रत्यब्दकरणे फलत्वं | ||
| स्वरूपं प्रस्तोतुं मङ्गलम् | १ | १४ | सेवायाः | ६-९ | ५३-५५ |
| तुरीयपुरुषार्थसाधनम् | २ | १४ | सेवायां संयोगभावमुक्त्वा | ||
| स्वरूपस्यानन्दत्वम् | ३ | १४ | वियोगे विरहभावनम् | १-८ | ५५-५८ |
| तत् सिद्धयर्थं सेवनम् | ४ | १४ | नित्यसेवाभावना | १०५ | ६०-९२ |
| भगवान् तनुजाद्यै सेव्याः | ५ | १५ | भगवन्मन्दिरप्रार्थना | १ | ६० |
| आचार्यसेवितानि स्वरूपाणि | ६ | १५ | तन्मार्जनादि | २-३ | ६१ |
| श्रीगोवर्द्धननाथधर्मिस्वरूपम् | सिंहासनक्षालनम् | ४ | ६१ | ||
| तत्पीठिकाभावना च | ७ | १६ | जलपात्रभावनम् | ५ | ६२ |
| श्रीनवनीतप्रिये ऐश्वर्यम् | ८ | १७ | भोजनपात्राणां भावना | ६ | ६२ |
| श्रीमथुरानाथे वीर्यम् | ९ | १९ | प्रभोः प्रबोधनम् | ७ | ६३ |
| श्रीविठ्ठलेश्वरे यशः | १० | २१ | स्नपनम् | ८-९ | ६३ |
| श्रीद्वारकेश्वरे श्रीः | ११ | २१ | नमनम् | १० | ६३ |
| श्रीगोकुलचन्द्रे ज्ञानम् | १२ | २२ | शक्तिविज्ञापनाम् | ११ | ६४ |
| श्रीगोवर्द्धनधारिणि वैराग्यम् | १३ | २२ | श्रीमदाचार्यप्रार्थनम् | १२ | ६४ |
| श्रीमदनमोहने संयोगो | मङ्गलभोगविज्ञापनाम् | १३-२२ | ६५-६८ | ||
| धर्मारमा रसः | १४ | २३ | उच्छिष्टदानप्रार्थना | २३-२४ | ६८ |
| औत्सङ्गिकेष्वनेकलीला- | जलपात्रार्पणं तद्भावश्च | २५ | ६९ | ||
| निवेशः | १५ | २४ | आचमनम् | २६ | ६९ |
| शृङ्गारस्वरूपम् | १-१३ | २५-३५ | मुखवस्त्रम् | २७ | ७० |
| उत्सवानां भावना | ३६ | ५९ | ताम्बूलार्पणम् | २८ | ७१ |
| प्राकट्यभावनम् | १-६ | ३६-४० | स्नानार्थ विज्ञापनाम् | २९-३० | ७१ |
| राधाष्टमी | २ | ४१ | अभ्यङ्गम् | ३१-३२ | ७२ |
| वामनाविर्भावः | १ | ४१ | उद्वर्तनम् | ३३ | ७२ |
| विजयदशमी | १-२ | ४१ | स्नानम् | ३४ | ७३ |
| दीपोत्सवः | १-२ | ४२ | प्रोञ्छनम् | ३५ | ७३ |
| गोवर्द्धनपूजा | १-२ | ४३ | शृङ्गारभावविचारः | ३६-३८ | ७३-७४ |
| अन्नकूटः | १-२ | ४३ | अङ्गरागार्पणम् | ३९ | ७४ |
| प्रबोधिनी | १-२ | ४३-४४ | वस्त्रार्पणम् | ४० | ७५ |
| गतचर्या | १ | ४५ | भूषणार्पणम् | ४१ | ७५ |
| वसन्तः | १-२ | ४६ | गुञ्जामालार्पणम् | ४२ | ७५ |
| दोलोत्सवः | १-२ | ४६-४७ | मयूरचन्द्रिकार्पणम् | ४३ | ७५ |
| रामाविर्भावः | १-२ | ४७ | अञ्जनम् | ४४ | ७५ |
| श्रीमद्भागवतोत्सवः | १ | ४८ | तिलकम् | ४५ | ७६ |
| चन्दनयात्रा | १ | ४८ | पुष्पमालार्पणम् | ४६ | ७६ |
| नृसिंहाविर्भावः | १ | ४८ | वेणोः धारणम् | ४८ | ७६ |
| ज्येष्ठाभिषेकः | १-३ | ४९ | भावतार्थसंसर्गम् | ४९ | ७६ |
| रथोत्सवः | १-३ | ५०-५१ | गोपीवल्लभभोगः | ५० | ७७ |
| 2461 |
२ विषयः श्लोकाङ्कः पत्राङ्कः │ विषयः श्लोकाङ्कः पत्राङ्कः गोपार्पितपयःफेनं पयोर्पणञ्च ५१-५३ ७७ │ उत्थापनेफलाद्यर्पणम् ८०-८१ ८५ आरात्रिकम् ५४ ७८ │ सन्ध्याभोगादिनिवेदनम् ८२-८४ ८६ श्रीनवनीतप्रियस्य प्रेङ्खा- │ शृङ्गारोत्सारणम् ८५ ८६ न्दोलनम् ५५ ७८ │ दुग्धं सत्केनं चार्पणीयम् ८६ ८६ क्रीडनकादिनिवेदनम् ५६ ७८ │ तमोदीपनिवेदनम् ८७ ८६ राजभोगार्पणे धूपः ५७ ७९ │ शयनभोगार्पणम् ८८ ८७ दीपः ५८ ७९ │ शायनम् ८९ ८७ पात्रादिभावविचारः ५९-६२ ७९ │ कीर्त्तनेनानवसरभावनम् ९०-९५ ८७-९० शङ्खोदकेन संस्कारम् ६३ ८० │ फलनिष्कर्षः ९६ ९० तुलसीप्रक्षेपः प्रार्थना च ६४-६६ ८१ │ श्रीमदाचार्यसेवनम् ९७-९९ ९०-९१ महामन्त्रेण चरणयोस्तुलसी- │ पञ्चामृतभावना १००-१०५ ९१-९२ समर्पणम् ६७-६८ ८१ │ दैन्येन प्रार्थनम् १ ९२ पादपीठार्पणम् ६९ ८२ │ नामसेवनम् पुष्पमालार्पणम् ७० ८२ │ कृतसेवाचिन्तनम् २७ ९३-९६ आरात्रिकम् ७१ ८२ │ शरणमार्गः १ ९७ अनवसरभावनम् ७२-७७ ८२-८४ │ श्रीयमुनाप्रार्थना २-३ ९८ द्वारपिधानभावनम् ७८ ८४ │ त्रयोदशाभिरन्तिमविज्ञप्तिः १-१३ ९८-१०१ अनन्तरकरणीयम् ७९ ८४ │ 2462