अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयथा द्रव्यं च कर्ता च संयोगोऽप्यनयोस्तथा । यह निश्चित बात है कि पुरुषके भोगनेयोग्य द्रव्यमात्रकी संज्ञा सत्त्व है तथा जैसे द्रव्य और कर्ताका सम्बन्ध है, वैसे ही इन दोनोंका सम्बन्ध है ॥ १३ १/२ ॥ यथा प्रदीपमादाय कश्चित् तमसि गच्छति । तथा सत्त्वप्रदीपेन गच्छन्ति परमैषिणः ॥ १४ ॥ जैसे कोई मनुष्य दीपक लेकर अन्धकारमें चलता है, वैसे ही परम तत्त्वको चाहनेवाले साधक सत्त्वरूप दीपकके प्रकाशमें साधनमार्गपर चलते हैं ॥ १४ ॥ यावद् द्रव्यं गुणस्तावत् प्रदीपः सम्प्रकाशते । क्षीणे द्रव्ये गुणे ज्योतिरन्तर्धानाय गच्छति ॥ १५ ॥ जबतक दीपकमें द्रव्य और गुण रहते हैं, तभीतक वह प्रकाश फैलाता है। द्रव्य और गुणका क्षय हो जानेपर ज्योति भी अन्तर्धान हो जाती है ॥ १५ ॥ व्यक्तः सत्त्वगुणस्त्वेवं पुरुषोऽव्यक्त इष्यते । एतद् विप्रा विजानीत हन्त भूयो ब्रवीमि वः ॥ १६ ॥ ब्रह्माजीका ऋषियोंको उपदेश