भारतकोश
अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary

भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 227, कुल 421 में से

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इत्युक्तस्तु तथाकार्षीदुत्तङ्कश्चित्रभानुना । घृतार्चिः प्रीतिमांश्चापि प्रजज्वाल दिधक्षया ॥ ४८ ॥ अग्निदेवके ऐसा कहनेपर उत्तंकने उनकी आज्ञाका पालन किया। तब घृतमयी अर्चिवाले अग्निदेव प्रसन्न होकर नागलोकको जला डालनेकी इच्छासे प्रज्वलित हो उठे ॥ ४८ ॥ ततोऽस्य रोमकूपेभ्यो धम्यतस्तत्र भारत । घनः प्रादुरभूद् धूमो नागलोकभयावहः ॥ ४९ ॥ भारत! जिस समय उत्तंकने फूँक मारना आरम्भ किया, उसी समय उस अश्वरूपधारी अग्निके रोम-रोमसे घनीभूत धूम उठने लगा; जो नागलोकको भयभीत करनेवाला था ॥ ४९ ॥ तेन धूमेन महता वर्धमानेन भारत । नागलोके महाराज न प्राज्ञायत किंचन ॥ ५० ॥ महाराज भरतनन्दन! बढ़ते हुए उस महान् धूमसे आच्छन्न हुए नागलोकमें कुछ भी सूझ नहीं पड़ता था ॥ ५० ॥ हाहाकृतमभूत् सर्वमैरावतनिवेशनम् । वासुकिप्रमुखानां च नागानां जनमेजय ॥ ५१ ॥

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