अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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यथा कंसश्च केशी च धर्मेण निहतौ मया । तेन सत्येन बालोऽयं पुनः संजीवतामयम् ॥ २३ ॥ 'मैंने कंस और केशीका धर्मके अनुसार वध किया है, इस सत्यके प्रभावसे यह बालक फिर जीवित हो जाय' ॥ २३ ॥ इत्युक्तो वासुदेवेन स बालो भरतर्षभ । शनैः शनैर्महाराज प्रास्पन्दत सचेतनः ॥ २४ ॥ भरतश्रेष्ठ! महाराज! भगवान् श्रीकृष्णके ऐसा कहनेपर उस बालकमें चेतना आ गयी। वह धीरे-धीरे अंग-संचालन करने लगा ॥ २४ ॥ इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि परिक्षित्संजीवने एकोनसप्ततितमोऽध्यायः ॥ ६९ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें परिक्षित्को जीवनदानविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ६९ ॥