अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें'भैया! भरतश्रेष्ठ! यह तुम्हारे भानजे सुरथका औरस पुत्र है। पुरुषप्रवर पार्थ! इसकी ओर देखो, यह तुम्हें प्रणाम करता है' ।। २६ १/२ ।। इत्युक्तस्तस्य पितरं स पप्रच्छार्जुनस्तथा ।। २७ ।। क्वास़ाविति ततो राजन् दुःशला वाक्यमब्रवीत् । राजन्! दुःशलाके ऐसा कहनेपर अर्जुनने उस बालकके पिताके विषयमें जिज्ञासा प्रकट करते हुए पूछा—'बहिन! सुरथ कहाँ है?' तब दुःशला बोली— ।। २७ १/२ ।। पितृशोकाभिसंतप्तो विषादार्तोऽस्य वै पिता ।। २८ ।। पञ्चत्वमगमद् वीरो यथा तन्मे निशामय । 'भैया! इस बालकका पिता वीर सुरथ पितृशोकसे संतप्त और विषादसे पीड़ित हो जिस प्रकार मृत्युको प्राप्त हुआ है, वह मुझसे सुनो ।। २८ १/२ ।। स पूर्वं पितरं श्रुत्वा हतं युद्धे त्वयानघ ।। २९ ।। त्वामागतं च संश्रुत्य युद्धाय हयसारिणम् । पितुश्च मृत्युदुःखार्तोऽजहात् प्राणान् धनंजय ।। ३० ।। 'निष्पाप अर्जुन! मेरे पुत्र सुरथने पहलेसे सुन रखा था कि अर्जुनके हाथसे ही मेरे पिताकी मृत्यु हुई है। इसके बाद जब उसके कानोंमें यह समाचार पड़ा है कि तुम घोड़ेके