अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें**कार्तवीर्य अर्जुन बोला—**समुद्र! यदि कहीं मेरे समान धनुर्धर वीर मौजूद हो, जो युद्धमें मेरा मुकाबला कर सके तो उसका पता बता दो। फिर मैं तुम्हें छोड़कर चला जाऊँगा ॥ ६ ॥ समुद्र उवाच महर्षिर्जमदग्निस्ते यदि राजन् परिश्रुतः । तस्य पुत्रस्तवातिथ्यं यथावत् कर्तुमर्हति ॥ ७ ॥ **समुद्रने कहा—**राजन्! यदि तुमने महर्षि जमदग्निका नाम सुना हो तो उन्हींके आश्रमपर चले जाओ। उनके पुत्र परशुरामजी तुम्हारा अच्छी तरह सत्कार कर सकते हैं ॥ ७ ॥ ततः स राजा प्रययौ क्रोधेन महता वृतः । स तमाश्रममागम्य राममेवान्वपद्यत ॥ ८ ॥ स रामप्रतिकूलानि चकार सह बन्धुभिः । आयासं जनयामास रामस्य च महात्मनः ॥ ९ ॥ ततस्तेजः प्रजज्वाल रामस्यामिततेजसः । प्रदहन् रिपुसैन्यानि तदा कमललोचने ॥ १० ॥