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अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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साहिब बन्दगी

साहिब ने उसका प्रेम देखा ते उसे परम पुरुष का ज्ञान दिया, जिसे सुन वो बहुत प्रसन्न हुआ।

अंबु मिलत अंकर सुख माना । तैसहिं मधुकर सब्दहिं जाना ॥ पुरुष भाव सुन तेहि हरषंता । मोकहैं लोक दिखावहु संता ॥

जैसे जल मिलने से अंकुर फूटकर मानो अपनी खुशी प्रकट कर देते हैं, ऐसे ही मधुकर साहिब के शब्द सुन प्रसन्न हो गया और कहने लगा कि मुझे वो लोक दिखाओ

राख्यो देह हंस लै धाये । अमर लोक लैं तिहिं पहुँचाये ॥ सोभा लोक देख हरषाना । तब मधुकर को मन पतियाना ॥

तब साहिब उसकी आत्मा को शरीर से निकाल अमर लोक गये। अमर लोक की सोभा को देख वो बड़ा प्रसन्न हुआ और उसे विश्वास हो गया।

इसके अतिरिक्त शृंगी ऋषि, वशिष्ठ मुनि, आदि सहित सात जीवों को साहिब ने त्रेता में तारा।

मधुकर जेते जीव, लोकहिं कीन्ह पयान ॥ तातैं नाम मुनीन्द्र कहि, जीव सत्त दान ॥