अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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अनुरागसागर वाणी
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अनुरागसागर वाणी
| विषय सूची | पृष्ठ संख्या |
|---|---|
| सतगुरु वंदना | 7 |
| शब्द के प्रेमी | 8 |
| अंत समय का मीत | 11 |
| मृतक होय सो साधु | 12 |
| गुरु कृपा से साधु कहावै | 18 |
| सृष्टि उत्पत्ति से पहले का रहस्य | 21 |
| सोलह सुत की उत्पत्ति | 25 |
| काल निरंजन कीनहीं तपस्या | 27 |
| निरंजन का पुनः तप | 32 |
| त्रिदेव की उत्पत्ति | 41 |
| निरंजन मन बनकर गुप्त हुआ | 43 |
| त्रिदेवों ने किया समुद्र मंथन | 44 |
| ब्रह्मा को दिया वेद ने रहस्य | 48 |
| ब्रह्मा गये आकाश में | 52 |
| नहीं पहुँच पाए विष्णु | 53 |
| ब्रह्मा को लेकर आद्य शक्ति व्याकुल हुई | 55 |
| ब्रह्मा को लाने चली गायत्री | 57 |
| शाप से ग्रसित हुए सब | 65 |
| विष्णु को हुए पिता के दर्शन | 69 |
| धर्मदास का संशय | 70 |
| विष्णु बने ठाकुर | 72 |
| चौरासी लाख योनियाँ बनीं | 74 |
| चार खानि के तत्व भेद | 75 |
| ज्ञान विभिन्नता का कारण | 77 |
| विभिन्न योनियों से मानव तन में आए हुएओं की पहचान | 78 |