अनुरागसागर वाणी
Anuragsagar Vani
स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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साहिब बन्दगी
गायत्री ने कहा कि मैंने देखा, ब्रह्मा ने पिता के शीश को स्पर्श कर वहाँ फूल चढ़ाया और उसी से यह पुहुपावती (पंपावती) नामक कन्या उत्पन्न हुई। यह बिलकुल सच है, मैं थोड़ा सा भी झूठ नहीं बोल रही हूँ, यदि तुम्हें यकीन न हो तो पंपावती से ही पूछ लो।
माता ने पुहुपावती से पूछा
कहु पुहुपावती मोहि, दरश कथा निरवार के ॥
यह मैं पूछों तोहि, किमि ब्रह्मा दरसन किये ॥
अद्या शक्ति ने पुहुपावती से कहा कि मैं तुमसे पूछती हूँ, बताओ क्या ब्रह्मा ने पिता के दर्शन किये?
पुहुपावती ने कहा
पुहु पावती बचन तब बोली । माता सत्य बचन नहीं डोली ॥
दर्शन सीस लह्यो चतुरानन । चढ़े सीस यह धर निश्चय मन ॥
पुहुपावती ने भी झूठी गवाही देते हुए कहा कि ब्रह्मा ने पिता के शीश को देखा।
साख सुनत अद्या अकुलानी । भा अचरज यह मर्म न जानी ॥
गवाही सुनकर शक्ति व्याकुल हुई, उसे अचरज हुआ कि यह कैसे हुआ! क्योंकि निरंजन ने तो कहा था कि वो किसी को दिखेगा नहीं। अद्या को रहस्य का पता न चला कि सब झूठ बोल रहे हैं।
काल जो कहिये अलख निरंजन, चारों वेदन गाई हो। यह मत से सब दुनियां उरझी, पाप पुण्य भुगताई हो॥