भारतकोश
अनुरागसागर वाणी

अनुरागसागर वाणी

Anuragsagar Vani

स्वामी मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished144 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 144 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 83

अनुरागसागर वाणी

83

निह अछर है सार, अछर ते लिखि पावई ॥

धर्मनि करो विचार, निह अछर निह तत्व है ॥

साहिब धर्मदास को सार तत्व के विषय में समझाते हुए कह रहे हैं कि वो निःअक्षर है, अक्षर की सीमा से परे है, अक्षर तो लिखा जा सकता है, इसलिए हे धर्मदास! जो सार तत्व है, वो निःअक्षर है, निःतत्व है।

शब्द शब्द सब कोई कहे, वह तो शब्द विदेह। जिभया पर आवे नहीं, निरख परख के लेह ॥