अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)
Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu
भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूत्र-१९ 137 एकवर्णीभविष्यन्ति वर्णाश्चत्वार एव च। वर्णान्तराणि भिद्यन्ते यास्यन्ति प्रलयं प्रजाः ॥ 16 ॥ कलिकाल की इस दुराचार की विभीषिका के फलस्वरूप मेघों में पानी की कमी से वर्षा कम हो जाएगी। वर्षा की कमी से धरती में अनाज की पैदावार घटेगी और गायों के दूध भी कम हो जाएगा या सूख जाएगा तथा कुछ दूध गायों से प्राप्त भी होगा तो उसमें घी नाम मात्र का भी नहीं रहेगा। समय इतना विकृत होगा कि चारों वर्गों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) का लोप हो जाएगा और सभी लोग एकवर्णी हो जाएँगे तथा एक दूसरे वर्ण आपस में अन्तर्वर्णी सम्बन्ध स्थापित करके वर्णसङ्करी हो जाएँगे। इस प्रकार से प्रजा प्रलय को प्राप्त हो जाएगी। दुर्भिक्षाणि भविष्यन्ति राज्ञां दुर्द्यचेतसाम्। वर्णान्तर वि राज्ञां ते विदुर्दुर्गे शून्यचेतसा ? ॥ 17 ॥ अधर्मीभवत् समस्तं दयाधर्मविवर्जितम्। कीर्तितो बुद्धावतारः कलौ च नवमो हरिः ॥ 18 ॥ ऐसा समय भी आ जाएगा कि दुर्भिक्ष, अकाल पड़ते रहेंगे, राजा लोग भी दुर्दान्त और दुष्टचित्त वाले हो जाएँगे और राजा कई वर्णान्तरों के होने लगेंगे। विद्वान वर्गों में भी चेतना शून्यता इतनी बढ़ जाएगी कि वे भी अपना कर्तव्य भूल जाएँगे। सभी अधर्मी हो जाएँगे और दयाधर्म रहित हो जाएँगे। इस प्रकार की स्थिति इस कलिकाल में बुद्धावतार के रूप में आने वाले नवें विष्णु अवतार के बाद की होगी। अथ कल्कि अवतारवर्णनं — ततः कलियुगान्ते चोत्पत्स्यति दशमो हरिः। ब्राह्मणो हरिपिङ्गलः याज्ञवल्क्यपुरोहितः ॥ 19 ॥ ततो हरिः कलेरन्ते दशमः सम्भविष्यति। कुम्भलग्नभवो देवो ह्यश्वारूढो जगत्पतिः ॥ 20 ॥ म्लेच्छानां छेदनं कृत्वा यजेद् देवं सुवर्णकम्। एकच्छत्रं धराराज्यं लक्ष्म्याः कृतयुगे पुरा ॥ 21 ॥ ऐसे में दसवें अवतार के रूप में कलियुग के अन्त में विष्णु हरिपिङ्गल नामक याज्ञवल्क्य पुरोहित ब्राह्मण के घर जन्म लेंगे। वह कलियुग के अन्त में जन्म लेने वाले दशमें हरि होंगे जो कुम्भ लग्नोदय की वेला में अश्वारूढ़ होकर सारे जगत के पति होंगे। वे म्लेच्छों का नाश करके सुवर्णक देव की यज्ञ, पूजा प्रचलित करेंगे और इस पृथ्वी पर पुनः एकच्छत्र शासन की स्थापना करेंगे तथा पहले के सतयुग जैसी लक्ष्मी का पुनः प्रसार करेंगे।