अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)
Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu
भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें138 अपराजितपृच्छा वैष्णवावतारकीर्तन फलमाह — इदं जन्मरहस्यं तु कीर्तयिष्यन्ति ये नरः । सुलभश्च हरिस्तेषां नित्यं वै सर्वजन्मसु ॥ २२ ॥ ॐ नमो वासुदेवाय नमो नारायणाय च । नमः कृष्णायेतिमन्त्राः सर्वप्रापप्रणाशनाः ॥ २३ ॥ हरि के इस प्रकार के जन्म रहस्य को जो लोग गाते रहेंगे, उनको सभी जन्मों में भगवान् विष्णु सदा सुलभ होंगे। उन हरि को कीर्तन द्वारा पाने का उपाय 'ॐ नमो वासुदेवाय', 'ॐ नमो नारायणाय', 'ॐ नमः कृष्णाय' आदि मन्त्र हैं जो समस्त पापों का प्रणाशन करने वाले, शमन करने वाले हैं। शृणोति जन्मरहस्यं ब्रह्महा गुरुतल्पगः । स्त्रीबालघातकश्चैव सुरापो वृषलीपतिः ॥ २४ ॥ मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति। यः पठेत् परया भक्त्या विष्णुजन्मप्रकीर्तितम् ॥ २५ ॥ मर्त्यलोकपरिभ्रष्टो विष्णुलोकं स गच्छति। ईप्सितं लभते राज्यं स्वर्गे वा भूमिशासने ॥ २६ ॥ गतागता निवर्तन्ते चन्द्रसूर्यादयो ग्रहाः । अद्यापि न निवर्तन्ते द्वादशाक्षरचिन्तकाः ॥ २७ ॥ श्री हरि के इस जन्म रहस्य को भी सुनते रहेंगे, वे ब्रह्मघाती या गुरुतल्पगामी पापी स्त्रीघाती, बालघाती, सुरापान करने वाला और कुलटा स्त्री के पति भी क्यों न हो, सभी पापों से मुक्त होकर वे विष्णुलोक में जाएँगे। अतः जो भी परम् भक्तिपूर्वक इस विष्णु जन्म की कथा को पढ़ेगा, वह मर्त्यलोक में परिभ्रष्ट होने पर भी विष्णुलोक में ले जाने का अधिकारी हो जाएगा एवं पुनर्जन्म लेने पर वह अपनी इच्छानुसार चाहा हुआ भूमिशासन या स्वर्ग का राज्य प्राप्त करेगा। इस द्वादशाक्षर मन्त्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जाप करने वाले को कोई ग्रहबाधा नहीं पहुँचा सकते, सूर्य-चन्द्रमा आदि ग्रहों की पूरी दशाएँ भी आई-गई हो जाती हैं। इति सूत्रसन्तानगुणकीर्तिप्रकाशप्रोक्तभुवनदेवाचार्योक्तापराजितपृच्छायां विष्णोर्जन्मरहस्यदशावताराधिकारो नाम नवविंशं सूत्रम् ॥ २९ ॥ इस प्रकार भुवनदेवाचार्य कृत सूत्रसन्तानगुणकीर्ति प्रकाश या अपराजितपृच्छा में विष्णु के जन्म रहस्य, दशावताराधिकार नामक उनतीसवाँ सूत्र पूर्ण हुआ ॥ २९ ॥