अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)
Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu
भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा
पृष्ठ 195, कुल 535 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूत्र-३१ 147 सोमनाथः प्रभासश्च कर्दमः शशिभूषणः। निष्कदाख्यः सहस्राक्ष ऋणमुक्तिः पापान्तकः ॥ ९ ॥ अर्कस्थाल्यमनार्कस्वरं ? तवपुत्रा एकादश । एकादशैते रुद्राक्ष प्रभासक्षेत्रसम्भवाः ॥ १० ॥ इस प्रकार बृहस्पति के भानजे और वसु के हृदय को आनन्द देने वाले उनके पुत्र प्रभास को भगवान् शिव महेश्वर ने वचन दिया कि तुम्हारे ग्यारह पुत्र होंगे जो मेरे ही अंशरूप होंगे। इनके नाम होंगे— 1. सोमनाथ, 2. प्रभास, 3. कर्दम, 4. शशिभूषण, 5. निष्कद, 6. सहस्राक्ष, 7. ऋणमुक्ति, 8. पापान्तक, 9. अर्कस्थाली, 10. अनार्क और 11. स्वर। ये तुम्हारे ग्यारह पुत्र कहलाएँगे। ये सभी प्रभास क्षेत्र में उत्पन्न एकादश रुद्रों के ही समान समझें।¹ विश्वकृद् विश्वकर्मा च त्वष्टा स्याद् देववर्धकः। भूर्भुवर्भुवनेशश्च तथा भुवनदेवकः ॥ ११ ॥ पुनरुच्चार्य नामानि विश्वेशः त्रिदशेश्वरः। विश्वश्च विश्वनिरतस्स्वयं च सृष्टिकोद्भवः ॥ १२ ॥ नासत्यावश्विनौ दस्रौ प्रोक्तौ देवचिकित्सकौ । जगत्कर्ता च रुद्रश्च प्रभासो वसुनन्दनः ॥ १३ ॥ सृष्टा च सर्वशिल्पानां जगन्नेत्रस्तदुद्भवः। चतुर्दश्यां समुत्पन्नः स्त्रष्टा विश्वपतिस्तथा ॥ १४ ॥ कार्तिक्यां कृष्णपक्षे तु दीपोत्सवसमुद्भवः। महोत्सवास्तथा पञ्च तृतीयो ²यावतीदिनी ॥ १५ ॥ स्वयं साक्षाद् रुद्रमूर्तिर्विश्वकृद् विश्वशेखरः। विश्वकृद्, विश्वकर्मा, त्वष्टा, देववर्धकी, भूर्भुवः भुवनदेव, भुवनदेवक— इन नामों को पुनः कहते हुए विश्वेश, त्रिदशेश्वर, विश्व, विश्वनिरत और सृष्टिकोद्भव, नासत्य, अश्विनी, दस्र, देव चिकित्सक, जगतकर्ता, रुद्र, प्रभाव, वसुनन्दन, सृष्टा और सभी शिल्पियों के जगतनेत्र³ स्वरूप आपकी उत्पत्ति चतुर्दशी को हुई। कार्तिकमास में
- इन्हीं से सोमपुरा शिल्पियों की एकादश गोत्रों का प्रवर्तन माना जाता है।
- 'यावनोदिनी ?' प्रकाशित पाठः। शब्दकल्पद्रुम में 'यावतिथः' शब्द के लिए कहा है— यावत्+ तस्य पूरणे डट्। ऐसे में मनुस्मृति का यह वचन प्रमाण है— आद्याद्यस्य गुणांस्त्वेषामाप्नोति परःपरः। योयो यावतिथश्चैषां सस तावद्गुणः स्मृतः ॥ (मनु. 1, 20)
- ये विश्वकर्मा के नाम हैं। विश्वकर्मापुराण में विश्वकर्मा के सौ नामों की सूची है। यह यहाँ प्रासङ्गिक ही