भारतकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

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xliv उपवंशादीनां मर्मफलमाह — 307 ब्रह्मकर्णेषु महामर्ममाह — 307 वास्तुपुरुषस्य शिरोखातफलमाह — 308 दिक्पालादिवास्तुदेवपूजाबलिकर्मयुक्तिर्नाम षष्टितमं सूत्रम् ॥ 60 ॥ 309-315 अन्य देवताः — 309 तथा चान्य देवताः — 310 चरक्यादीनामष्टदेव्यां पूजासम्भाराह — 310 दिक्पालक्षेत्रपालश्च बलिं — 311 प्राचीं इन्द्रपूजानिर्देशमाह — 311 आग्नेयां अग्निदेवपूजानिर्देशमाह — 311 दक्षिणदिशायां यमदेवपूजानिर्देशमाह — 312 नैर्ऋत्यायां पूजानिर्देशमाह — 312 परदिशायां जलेश्वरपूजानिर्देशमाह — 312 वायव्यकोणायां वायुदेवपूजानिर्देशमाह — 313 उत्तरदिशायां निधिराजपूजानिर्देशमाह — 313 ईशान्यां रुद्रदेवपूजानिर्देशमाह — 313 अधस्तात्तु विष्णुदेवपूजानिर्देशमाह — 314 अधोर्ध्वायां ब्रह्मदेवपूजानिर्देशमाह — 314 आचार्यसूत्रधारपूजानिर्णयो नामैकषष्टितमं सूत्रम् ॥ 61 ॥ 315-319 सूत्रधारप्रशंसामाह — 316 शिल्पिनसम्मानाह — 317 सूत्रधारसम्मुखे प्रार्थनानिवेदनम् — 318 वास्तुपरिभ्रमणादिगुणदोषनिर्णयो नाम द्वाषष्टितमं सूत्रम् ॥ 62 ॥ 319-324 वास्तुदिशामुक्तिमानं रव्यानुसारेण वास्तुमुखस्थितिं — 320 इत्यमनन्तर एषां फलमाह — 320 दिक्विदिक वास्तुवेधमाह — 322 अन्यान्य दोषमाह — 323 गृहारम्भप्रतिष्ठादिनमासनिर्णयो नाम त्रिषष्टितमं सूत्रम् ॥ 63 ॥ 325-332 मासानुसारेणगृहारम्भफलमाह — 325 तिथ्यानुसारेणगृहारम्भफलमाह — 326