भारतकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

पृष्ठ 78, कुल 535 में से

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पृष्ठ 78

सूत्र-६ 29 शान्ति प्रदान करने वाली शक्ति होती है। इति सूत्रसन्तानगुणकीर्तिप्रकाशप्रोक्त श्रीभुवनदेवाचार्योक्तापराजितपृच्छायां सप्तोर्ध्वलोकाधिकारो नाम पञ्चमं सूत्रम् ॥ ५ ॥ इस प्रकार भुवनदेवाचार्य कृत सूत्रसन्तानगुणकीर्ति प्रकाश या अपराजितपृच्छा में सप्त ऊर्ध्वलोक अधिकार नामक पाँचवाँ सूत्र पूर्ण हुआ ॥ ५ ॥ अष्टशक्त्युद्भवो नाम षष्ठं सूत्रम् ॥ ६ ॥ अपराजित उवाच - उत्पत्ति कथ्यतां सर्वा देवानां च नृणां तथा। दैत्यरक्षोऽसुराणां च पशुपक्षिशरीरिणाम् ॥ १ ॥ के ते ब्रह्मसमुद्भूताः के ते विष्णुसमुद्भवाः। कस्माद्देवाच्च के जाताः संसारे रूपधारिणः ॥ २ ॥ अपराजित बोले – आपने सभी देवों, मनुष्यों तथा दैत्यों, राक्षसों और असुरों और पशु-पक्षी देहधारी जीवों के विषय में उनकी उत्पत्ति का वर्णन तो किया, परन्तु कितने जीव ब्रह्मा से उत्पन्न हुए, कितने जीव विष्णु से उत्पन्न हुए तथा किस प्रकार किस देव से कौन-कौन उत्पन्न हुए और इस संसार में रूप धारण कर सके ? विश्वकर्मोवाच – ब्रह्मणो हृदयाज्जातः काश्यपो मुनिपुङ्गवः । कश्यपप्रभवा सृष्टिस्त्रैलोक्योदयशालिनी ॥ ३ ॥ कश्यपस्य परा ह्यष्टावादित्याद्याश्च शक्तयः । जनन्यो जगतस्ताभ्यः संसारसृष्टिकोद्भवः ॥ ४ ॥ विश्वकर्मा बोले – ब्रह्मा के हृदय से मुनिपुङ्ग, मुनियों में राजा काश्यप मुनि उत्पन्न हुए। इन कश्यप से ही तीनों लोकों को बढ़ाने वाली सृष्टि का प्रादुर्भाव हुआ। कश्यप की पत्नी अदिति से निरन्तर आठ पराशक्तियाँ ही इस जगत की जननियाँ हैं और इनसे ही संसार की समस्त सृष्टि उद्भूत हुई है।¹

  1. विष्णुपुराण में दक्ष कन्याओं, कश्यप की स्त्रियों के नाम क्रमशः अदिति, दिति, दनु, अरिष्टा, सुरसा, खसा, सुरभि, विनता, ताम्रा, क्रोधवशा, इरा, कद्रु और मुनि आए हैं— कश्यपस्य तु भार्या यास्तासां नामानि मे शृणु। अदितिर्दितिर्दनुश्चैवारिष्टा च सुरसा खसा॥ सुरभिर्विनता चैव ताम्रा क्रोधवशा इरा। कद्रुर्मुनिश्छ धर्मज्ञ तदपत्यानि मे शृणु॥ (विष्णु. 1, 15, 124-125) इसी पुराण के पहले अंश के 21वें अध्याय में इनकी सन्तानों का भी वर्णन उपलब्ध होता है।
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