भारतकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

पृष्ठ 92, कुल 535 में से

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सूत्र-९ 43 सातवें द्वीप पुष्कर के कीर्तिमान महाराज पुष्कर (अधिपति) नाम से विख्यात है। इसी तरह से गोमेद द्वीप के महाराज गोमेद और शाल्मलि द्वीप के महाराज शाल्मलि नृप कहे गए हैं। शाकद्वीप के महाराज शाक और क्रौञ्च द्वीप के महाराजा क्रौञ्च के नाम से विख्यात है। कुश द्वीप के महाराज परमवीर महाबली कुश नरेश है। इस तरह मेरु के दक्षिणी भाग में महान् रूपों वाले भूपालगण महाराजा विद्यमान हैं। अथ जम्बूद्वीपवर्णनमाह — पृथुः पृथुमहीश्वरः जम्बूद्वीपाधिपः पृथुः । मेरोः प्रदक्षिणे कुक्षौ जम्ब्वाख्यश्च महातरुः । यस्य नाम्ना तु विख्यातो जम्बूद्वीपेतिसञ्ज्ञितम् ॥ ९॥ जम्बू द्वीप के अधिपति महाराज पृथु है और ये पृथु महाराज इस समस्त पृथ्वी के महीश्वर, स्वामी है। मेरु पर्वत के प्रदक्षिण कुक्ष में जम्बू नाम का एक वृक्ष है, इसी के नाम से इस द्वीप का नाम जम्बू विख्यात हुआ है। एक