अर्थसंग्रह (लौगाक्षि भास्कर - पूर्वमीमांसा न्याय एवं धर्म-मीमांसा सटीक)

अर्थसंग्रह (लौगाक्षि भास्कर - पूर्वमीमांसा न्याय एवं धर्म-मीमांसा सटीक)
Arthasangraha of Laugakshi Bhaskara with Hindi Commentary
लौगाक्षि भास्कर द्वारा
DevanagariHindipublished84 पृष्ठ
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अर्थसंग्रहविषयानुक्रमणिका ।
| विषयः | पृष्ठम् | विषयः | पृष्ठम् |
|---|---|---|---|
| मङ्गलाचरणम् | १ | द्वितीयारूपाया विनियोक्त्र्या उदाहरणं | २० |
| तन्त्रारम्भकसूत्रावतरणम् | २ | द्वितीयाविनियोक्त्र्या उदाहरणम् | २१ |
| धर्मविचारशास्त्रस्यावश्यकता | ,, | सप्तमीविभक्तिविनियोक्त्र्या उदाहरणम् | ,, |
| धर्मलक्षणप्रश्नः | ३ | अमूर्ताया अपि भावनाङ्गत्वम् | ,, |
| वेदस्य धर्मप्रतिपादकत्वम् | ४ | भावनाया आख्यातवाच्यत्वम् | २२ |
| भावनाविचारः | ५ | लिङ्गनिर्वचनम् | २६ |
| शाब्दीभावना | ,, | वाक्यनिर्वचनम् | २८ |
| शाब्द्या लौकिकवैदिकभेदौ | ६ | प्रकृतिविकृतिलक्षणम् | २९ |
| आर्थीभावनालक्षणम् | ८ | प्रकरणनिरूपणम् | ३१ |
| आर्थीभावनाया अंशत्रयम् | ,, | प्रकरणद्वैविध्यम् | ,, |
| वेदलक्षणविचारः | १० | महाप्रकरणम् | ,, |
| विधिमीमांसा | ,, | अवान्तरप्रकरणम् | ३२ |
| वाक्यभेददोषपरिहारः | ११ | संदंशलक्षणम् | ,, |
| गुणविध्यादिभेदाः | १२ | स्थाननिरूपणम् | ३५ |
| उभयविधित्वम् | १३ | पाठसादेश्येन विनियोगः | ,, |
| विधिश्चतुर्विधः | १४ | अनुष्ठानसादेश्येन विनियोगः | ३६ |
| उत्पत्तिविधिः | ,, | समाख्यानिरूपणम् | ३७ |
| यागस्य रूपद्वयम् | १५ | विनियोगविधिबोधिताङ्गानि | ३८ |
| विनियोगविधिः | १६ | संनिपत्योपकारकाणि | ,, |
| विधेः श्रुत्यादिषट्प्रमाणानि | १९ | आरादुपकारकाणि | ३९ |
| श्रुतिनिर्वचनम् | ,, | प्रयोगविधिः | ,, |
| विनियोक्त्री श्रुतिस्त्रिधा | ,, | क्रमस्वरूपम् | ४० |
| तृतीयाविभक्तिरूपाया उदाहरणम् | २० | श्रुत्यादिषट्प्रमाणानि | ४१ |