आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)
Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary
आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा
DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ
पृष्ठ 17, कुल 134 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 17
भूमिका ॥ १५ इस समय देखा जाता है जो, बलदेव का नाम रौहिणेय है। और बुध का भी नाम रौहिणेय है। गदाधारी (१) यह रौहिणेय श्रीकृष्ण के चिरसङ्गी हैं। गदाधारी अन्य रौहिणेय आदित्यदेव के चिरसङ्गी हैं। गदाधारी अन्य रौहिणेय आदित्यदेव के चिर सङ्गी हैं (२)। आदित्यदेव श्रीकृष्ण हुए, बलदेव को न्यायानुसार बुध ग्रह कहा जावे । घर का घर ही में मिला "गृहं चेत्स- मुविन्देत किमर्थं पर्वतं व्रजेत्" इस समय हम रासलीला वर्णन में प्रवृत्त हुए। रास-पूर्णिमा ॥
[चक्र-चित्र के अन्तर्गत शब्द:]
- केन्द्र व ग्रह: सूर्य, पृथिवी, चन्द्र, बुध
- राशियाँ व नक्षत्र (चक्र के अनुसार):
- हिन्दू मण्डल
- वृश्चिक: ज्येष्ठा, अनुराधा
- तुला: विशाखा, स्वाति
- कन्या: जल विषुव संक्रान्ति, चित्रा, हस्ता, उत्तर फाल्गुनी
- सिंह: पूर्व फाल्गुनी, मघा
- कर्कट: अश्लेषा, पुष्य, कर्कसङ्क्रान्ति
- मिथुन: पुनर्वसु, आर्द्रा, मृगशिरा
- वृष: रोहिणी, कृत्तिका
- मेष: भरणी, अश्विनी, महाविषुव संक्रान्ति
- मीन: रेवती, उत्तरभाद्रपद, पूर्वभाद्रपद
- कुम्भ: शतभिषा, धनिष्ठा, श्रवण
- मकर: उत्तराषाढ़, मकर संक्रान्ति
- धनु: पूर्वाषाढ़, मूल
(१) मुषली मुषला युधात् । (२) बुध ग्रह सूर्य के २८ अंश के बीच में रहता है अतएव यह प्रायः सूर्य किरण में छिपा रहता है।