आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)
Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary
आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंॐ समर्पणम् श्रीयुत मान्यवर क्षत्रियवंशावतंस परमोदार सनातन आर्य्यधर्म्मरक्षक श्रीमन्महाराजाधिराज सर नाहरं सिंह बहादुर शाहपुराधीशेष्वित्-उदयनाथ- यर्णसिंहस्य कोटिशोन्नतय स्स्फुरन्तुतराम् भो ! आप ने सनातनार्य्यधर्म्म की उन्नति करके हम भारत वासियों का परम उपकार किया है। ईश्वर श्रीमान् जैसे धर्म्मरक्षक, दानशील, आदर्शपुरुष और आर्य्यग्रन्थों के उन्नायक महाराजों की प्रतिदिन संख्या बढ़ावे। श्रीमान् की रुचि स० आ० ध० की ओर देख कर मैंने वेद के छः अङ्गों में से नेत्ररूपी वेदाङ्ग ज्योतिष के-उस अपूर्व ग्रन्थ का भाषानुवाद किया है जिस में आज १४०१ वर्ष पूर्व ही से पृथिवी-भ्रमण-लिख रक्खा है। यह आर्यभटीय वा आर्य्यसिद्धान्त ग्रन्थ संस्कृत टीका सहित जर्मन देश में छपा था-आज तक भारत वर्ष में इस की ओर किसी का ध्यान नहीं गया था मैं ने बड़े परिश्रम से इसे जर्मन् देशान्तर्गत लिपेजिक स्थान से मंगवा कर सटीक सानुवाद एवं विस्तृत भूमिका सहित छपवाया है। इस सटीक सानुवाद वेदाङ्ग ज्योतिष ग्रन्थ को मुद्रित करा श्रीमानों के कर कमलों में विनयपूर्वक अर्पण कर आशा करता हूं कि श्रीमान् इस को स्वीकार कर मुझ अन्यान्य आर्षग्रन्थों के सानुवाद प्रकाशित करने में उत्साहित करेंगे। शास्त्रप्रकाश-कार्यालय श्रीमतामाज्ञाकारी- स्थान-मधुरापुर, बिद्दूपुर } क्षत्रिय कुमार- जि० मुज़फ़्फ़रपुर उदयनारायणसिंह