आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)
Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary
आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ आश्चर्यभटीयस्य- च्छादन किये ( १ ) और अनुराधा में उपनीत हो कलावती अवगुण्ठन विमोचनार्थ उद्योग करने पर देखती हैं कि श्रवणावस्थित त्रिविक्रम सम्मुख में श्वशुर के दर्शन से बड़े पुलकित हैं । कलावती अर्द्धावगुण्ठित भाव से श्रवणा अतिक्रम कर धनिष्ठा आदि एक २ नक्षत्र को प्रतिक्रम करती २ मुख कमल के नील अवगुण्ठन क्रम से मोचन करते २ चलने ( २ ) लगीं । अन्त में वृषराशि में उपनीत हो कृत्तिका और रोहिणी के वामभाग में आकर आश्वस्त्य भाव से आनन्द में नील अवगुण्ठन एक मात्र विमोचन कर सादर ऊंचे आसन पर बैठ गयीं । यों कार्त्तिकी पूर्णिमा की कौमुदी पौर्णमासी का उदय हो कर ज्योत्स्ना में जगत् आलोकमय हुआ । कोमुदी की ज्योत्स्ना-अङ्गना में आवृत्ता हो कर यशोदा देवी (कृत्तिका) छिपकर नीलमणि की रासलीला देखने लगीं । और बलदेव की माता भी अर्द्धाव-गु ण्ठित मुख से रासलीला देखने लगीं । किन्तु पौर्णमासी कलावती श्वश्रूजन सुलभ अकुण्ठित भाव अवलम्बन से सम्पूर्ण जगत् के सामने पृथिवी के पृष्ठदेश से वासर (दिवस) घर में रासलीला देखने की कामना से किनारे हो कर लुकछुक करती हैं । पुनर्वार जगत् की ओर चाह कर श्रीराधा की सम्पद् में गर्वित हो ठट्ठा कर हंसती हैं । उषा काल में कौमुदी चन्दमा वांके नजर से उभय पार्श्वस्थ वैवाहिक द्वय (३) की ओर दृष्टिपात कर अस्फुट स्वर से कहती हैं कि देखो देखो बहिन ! हमारी राधा आज स्वामी समागम से सखीकुलमध्ये (तारानिचय) कहां छिप गयीं ? कभी तो कार्त्तिक की चन्द्रिमा के आह्लाद से नाचती २ उन्मत्ता प्रायः हो कर पश्चात् वर्त्ती वैवाहिक सच्चिदानन्द गोपको कहते हैं कि वाह ! आज हमारा क्या शुभ दिन है ! आनन्दपुत्र आनन्दमय श्रीकृष्णकी कृपा से हमारी राधा पवित्रा हुयीं । नन्दराज आह्लाद से गदगदभाव में कहते हैं कि श्रीमती अहह ! तुम्हारी सुता राधा ही आद्या (४) शक्ति हैं । यह देखो ! श्रीकृष्ण का रश्मि चूड़ा (उर्द्ध मुख मयूख को) तुम्हारे राधा के पदतल को मार्जन और धौत करता है । यह देखो ! कौमुदी चन्द्रमा के ऊर्द्ध भाग में प्रजापति ब्रह्मा 'औरिक' मण्डल (५) विराजमान हैं । आज प्रजापति ब्रह्मा पूर्ण चन्द्ररूपी हंस पर (१) - अमावास्या ॥ (२) - शुक्लपक्ष की कलावृद्धि ॥ (३) - यशोदा और रोहिणी । (४) - कार्त्तिकी वर्ष विशाखासे गणित करने पर और राकाग्नि या विद्युत् = मूर्ति अग्नि का आदि विकाश है ॥ (५) Auriga constellation प्रजापति ब्रह्मा के शिरोदेश में प्रजापति नक्षत्र .Delta auriga हत् पदम से बहाहूत (Star capella) तारा दक्षिण कुक्षि में अग्निवारक (Star nath) ब्रह्म-हृत् तारक के पूर्व दक्षिण अंश मे त्रिभुजाकार छोटे २ तीन तारे (The kids) क्या त्रिवेद चिह्न (Emblem)