आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)
Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary
आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका ॥ २५ अथैतेषामाचार्याणां समयादिनिरूपणं तत्तद्रचितसिद्धान्तानामलाभेऽतीव काठिन्यमतो ऽस्माभिस्तोत्रज्योतिषसिद्धान्तग्रन्थकारपुरुषाणा मुत्तरोत्तरं ख- ण्डनप्रतिखण्डनद्वारेण बहुविशेषरचयितॄणां यावच्छक्यं तत्तद्ग्रन्थमर्मस्थलानां सम्यगवलोकनेन समयादिकं निरूप्यते ॥ उपरोक्त संस्कृत का आशय—नीचे लिखे सिद्धान्तज्योतिष के ग्रन्थों के नाम तो पाये जाते हैं पर ये ग्रन्थ नहीं मिलते अतएव ये ग्रन्थ कब २ बने इस का पता लगाना कठिन है ॥ सिद्धान्त ज्योतिष ग्रन्थों के नाम ॥ ग्रन्थ नाम । ग्रन्थ नाम । ग्रन्थ नाम । ग्रन्थ नाम । १ ब्रह्मसिद्धान्त । ६ मनुसिद्धान्त । ११ पुलस्तसिद्धान्त । १६ च्यवनसिद्धान्त २ मरीचिसद्धान्त । ७ अङ्गिरस्सिद्धान्त । १२ वसिष्ठसिद्धान्त । १७ गर्गसिद्धान्त । ३ नारदसिद्धान्त । ८ बृहस्पतिसिद्धान्त । १३ पराशरसिद्धान्त । १८ पुलिससिद्धान्त । ४ कश्यपसिद्धान्त । ६ अत्रिसिद्धान्त । १४ व्याससिद्धान्त । १६ लोमशसिद्धान्त । ५ सूर्य्यसिद्धान्त । १० सोमांसद्धान्त । १५ भृगुसिद्धान्त । २० यवनसिद्धान्त । आधुनिक पौरुष ज्योतिष ग्रन्थ ॥ ग्रन्थ नाम । ग्रन्थ कर्त्ता ग्रन्थनिर्माणकाल स्थान १ आर्य्यभटीय । पं० आर्य्यभट ४२३ शाके पटना २ पञ्चसिद्धान्तिका । पं० वराहमिहिर ४२७ ,, कालपी ३ ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त । पं० ब्रह्मगुप्त ५२० ,, भीलमाल (दक्षिणपश्चिमोत्तर) ४ द्विती. यआर्य्य सिद्धान्त । द्विती.यआर्यभट ८७५ ,, ५ सिद्धान्त शिरोमणि । पं० भास्कराचार्य्य १०७२ ,, दौलताबाद ६ सिद्धान्तसार्वभौम । पं० मुनीश्वर १५२५ ,, एलचपुर ७ तत्त्वविवेक । पं० कमलाकर भट्ट १५८० ,, विदर्भ आर्यभटीय ॥ उपलब्ध पौरुष ज्योतिष ग्रन्थों में सब से पुराना—“आर्यभटीय” है । आर्यभट नामक ज्योतिषी ने आर्याछन्द के १२० श्लोकों में इस ग्रन्थ को शाके ४२३ में—स्थान कुसुम पुर (बिहार प्रान्त के अन्तर्गत पाटलिपुत्र या पटना) में बनाया और इस ग्रन्थ का नाम “आर्यभटीय” रक्खा । लोग इसे “आर्य- सिद्धान्त,” “लघु आर्यसिद्धान्त” या “प्रथमार्य-सिद्धान्त” भी कहते हैं। आर्य- भट स्वयं अपने जन्मस्थान एवं ग्रन्थ निर्माणकाल के विषय में यों लिखते हैं कि — “ब्रह्म कु शशिशुधभृगुरविकुजगुरुकोणभगणान्ममस्कृत्य । आर्य्यभटस्त्विह निगदति कुसुम पुरेऽभ्यर्चितं ज्ञानम्॥१॥आ०भ०ग०प०१श्लो० भा०:--पृथिवी, चन्द्रमा, बुध, शुक्र, आदि अधिष्ठित परब्रह्म को नम-