आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)
Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary
आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआर्यभटीयस्य विषयाणां सूचीपत्रम् ॥ ३ विषय पृष्ठाङ्क दृष्टि के वैषम्य होने का कारण— ५८-५९ प्रतिमण्डल का प्रमाण और उस का स्थान— ५९ स्फुट ग्रहों का अन्तराल प्रमाण— ५९-६० भ्रमण प्रकार— ६०-६१ उच्च, नीच वृत्त के भ्रमण का प्रकार— ६१-६२ मन्द और शीघ्र के ऋण और धन का विभाग— ६२-६३ शनि, गुरु, मङ्गल (स्फुट) ६३-६६ भ, तारा, ग्रहों का विवर लाना— ६६ तृतीय पाद की विषयसूची समाप्त हुई । अपमण्डल का संस्थान— ६७-६८ अपक्रम मण्डल चारी ग्रहगण— ६८ अपमण्डल के चन्द्रमा का पात उत्तर से दक्षिण— ६८-७० चन्द्रमा आदि का दूर और निकटता से सूर्य प्रभा से उदयास्त ज्ञान— ७०-७१ स्वतः अप्रकाश भूमि आदि के प्रकाश का हेतु— ७१ कदम्बा और भूसंस्थान— ७१-७२ भूगोल के ऊपर प्राणियों का निवास— ७२ कल्प में भूमि की वृद्धि और ह्रास— ७२ भूमि का पूर्व की ओर चलना— ७२-७३ भपञ्जर के भ्रमण का कारण— ७३ मेरु प्रमाण और मेरु का स्वरूप— ७३-७४ मेरु, बड़वामुख आदि का अवस्थान— ७४ भूमि के चारों ओर पृथिवी के चतुर्थ भाग में ४ नगरियां— ७४-७५ लङ्का और उज्जयिनी के बीच का देश— ७५-७६ भूपृष्ठस्थित ज्योतिश्चक्र के दृश्य और अदृश्य भाग— ७६ ज्योतिश्चक्र में देवासुर दृश्य भाग— ७६-७७ देवादिकों का दिन प्रमाण— ७७-७८ गोल कल्पना— ७८-७९ क्षितिज में नक्षत्र और सूर्यादि ग्रहों का उदयास्त— ७९-८० द्रष्टा के कारण ऊंचे नीचे का विभाग— ८० दृङ्मण्डल, दृक्क्षेप मण्डल— ८०