भारतकोश
आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary

आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा

DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ

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४ आर्य्यभटीयस्य विषयाणां सूचीपत्रम् ॥ विषय पृष्ठाङ्क गोल के भ्रमण का उपाय— ८०-८१ क्षेत्र कल्पना का प्रकार और अक्षावलम्बक— ८१-८२ स्वाहोरात्रार्द्ध— ८२ निरक्ष देश में राशि का उदय प्रमाण— ८२-८३ दिन रात्र की हानि वृद्धि । ८२ स्वदेशीय राशियों का उदय । ८३-८४ इष्टकाल में शङ्कु का लाना । ८५ शङ्कु अग्रा को लाना । ८५-८६ अर्क अग्रा का लाना । ८६ सूर्य का सम मण्डलप्रवेश काल में शङ्कु का लाना ८६-८७ मध्यान्ह 'शङ्क और उस की छाया । ८७ दृक्क्षेप ज्या का लाना । ८७-८८ दृग्गति, उयावलम्बन योजन का लाना । ८८-८९ चन्द्रादि के उदयास्त लग्न सिद्धि के लिये अपने २ विक्षेप दृक् कर्म । ८९ आयर्न दृक्कर्म । ८९-९० चन्द्र, सूर्य, भूमि छाया के चन्द्र सूर्य ग्रहण के स्वरूप । ९० ग्रहणकाल । ९०-९१ भूछाया का दैर्घ । ९१ भूछाया के चन्द्रकक्षा प्रदेश में व्यास योजन का लाना । ९१-९२ स्थित्यर्ध का लाना । ९२ विमर्दार्धकाल का लाना । ९२-९३ ग्रस्त शेष प्रमाण— ९३ तात्कालिक ग्रास परिमाण— ९३ स्पर्श मोक्षादि ज्ञान— ९३-९४ गृहीत विम्ब स्थान वर्णन— ९४-९५ सूर्यग्रहण में अदृश्य भाग— ९५ स्वशास्त्र प्रतिपादित ग्रह गति से दृक् संपात द्वारा स्फुटत्वं-- ९५-९६ शास्त्र का मूल— ९६ उपसंहार— ९६ आर्य्यभटीय की विषयसूची समाप्त हुई ॥