अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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अष्टादशस्मृतिसूचीपत्रम् ॥
| संख्या | विषयाः | स्मृतिनामानि | पृष्ठानि |
|---|---|---|---|
| ८१ | + पिण्ड पितृ यज्ञ विधानम् । | ” | ३९ |
| ८२ | अग्न्याधानान्ते शेषकृत्यविचारः । | ” | ४६ |
| ८३ | आहिताग्नेर्नियमातिचारे प्रायश्चित्तानि । | ” | ४७ |
| ८४ | आहिताग्नेः प्रवासकाले कर्त्तव्यविचारः | ” | ५० |
| ८५ | पत्नीनां यज्ञानुज्ञाविचारः ।- | ” | ५१ |
| ८६ | यजमानपत्न्योरितरेकस्य ताभावे पुनराधानादि विचारः । | ५२ | |
| ८७ | आहिताग्नेरन्त्येष्टि कर्मविधिः ।+ | ” | ५५ |
| ८८ | दाहान्ते तिलाञ्जल्यादि शेष कृत्यम् | ” | ५८ |
| ८९ | आहिताग्नेर्विदेशमरणेऽन्त्येष्टिदाहादि विचारः । | ६० | |
| ९० | अस्थिसंचयन कर्म विधिः । | ” | ६१ |
| ९१ | सूतकेऽग्निहोत्रादिकर्मनिर्वाह विचारः | ” | ६२ |
| ९२ | अग्निहोत्रिणः सपिण्डीकरणाद्यदि विचारः ।- | ” | ६३ |
| ९३ | गर्भाधानादि होमेषु सामान्यविचारः | ” | ६४ |
| ९४ | ब्रह्मचारिणः कृत्यम् । | ” | ६६ |
| ९५ | चरुपशुकान्तादिमाध्यहोमे विशेषविचारः । | ६७ | |
| ९६ | कर्मकाण्डे पारिभाषिक शब्दादि विचारः । | ७० | |
| ९७ | दानधर्मे भूमिदानस्य विशिष्टं माहात्म्यम् । | १० बृहस्पतिस्मृतौ | १ |
| ९८ | गयाश्राद्धवृषोत्सर्गौ | ” | ४ |
| ९९ | भूम्यादि ब्रह्मस्वहरणे कुलक्षयादिदोषाः । | ६ | |
| १०० | मूर्खाय दाननिषेधो विदुषे दानसाफल्यम् । | ८ | |
| १०१ | कूपतडागादि निर्माणान्नजलादिदानप्रशंसा । | १० | |
| १०२ | धर्मशास्त्रप्रस्तावः । | ११-पाराशरस्मृतौ | १ |
| १०३ | कृतयुगादिषु धर्मशक्त्यादिह्रासः । | ” | ४ |
| १०४ | सदाचारादि ब्राह्मण धर्मः । | ” | ६ |
| १०५ | पञ्चमहायज्ञेष्वतिथियज्ञस्य विशिष्टं माहात्म्यम् । | ७ | |
| १०६ | कात्यारणो वर्णधर्मः | ” | १० |
| १०७ | ब्राह्मणादि गृहस्थानां धर्मः । | ” | १२ |
| १०८ | कृषिकर्मणि विशेष विचारः । | ” | १२ |
| १०९ | जन्ममरणयोरशौचादिव्याख्यानम् । | ” | १४ |
| ११० | अपमृत्युना मरणे दाहादिनिषेधः । | ” | २३ |
| १११ | पतितादिसंसर्गे प्रायश्चित्तम् । | ” | २४ |
| ११२ | स्त्रीपुरुषयोर्धर्मः । गर्भपातादिप्रायश्चित्तम् । | ” | २५ |