अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 142, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंऔशनसस्मृतिः ॥ ५
अभिषिक्तनृपस्याज्ञां परिपालयेत्तुवैद्यकम् ॥२६॥ आयुर्वेदमथाष्टांगं तन्त्रोक्तं धर्ममाचरेत् । ज्योतिषंगणितंवापि कायिकींवृत्तिमाचरेत् ॥ २७ ॥ नृपायांविधिनाविप्राज्जातो नृपहतिस्मृतः । नृपायांनृपसंसर्गात्प्रमादाद्गूढजातकः ॥ २८ ॥ सोऽपिक्षत्रियएवस्या-दभिषेकेचवर्जितः । अभिषेकंविनाप्राप्य गोजङ्गत्यभिधायकः ॥ २९ ॥ सर्वंतुराजवृत्त्य शस्यतेपदवंदनम् । पुनर्भूकरणेराज्ञानृपकालीनएवच ॥ ३० ॥ वैश्यायांविधिनाविप्राज्जातो ह्यंबष्ठउच्यते । कृष्यजीवीभवेत्तस्य तथैवाग्नेयवृत्तिकः ॥ ३१ ॥ ध्वजिनीजीविकावापि ह्यंबष्ठाःशस्त्रजीविनः । वैश्यायांचिप्रतश्चौर्यात्कुंभकारसउच्यते ॥ ३२ ॥ कुलालवृत्त्याजीवेत्तु नापितावाभवन्त्यतः ।
कहते हैं वह राजा की आज्ञा से वैद्यक करता है ॥ २६॥ वह अष्टांग आयुर्वेद अथवा तंत्र के कहे धर्मों को करै ज्योतिष वा गणित विद्या से अपना निर्वाह करे ॥ २७ ॥ क्षत्रिय की कन्या में जो ब्राह्मण से पैदा हो वह नृप और इस नृप से क्षत्रिय कन्या में जो पुत्र पैदा हो वह गूढ़ कहलाता है ॥ २८ ॥ और वह भी क्षत्रिय होता परन्तु अभिषेक (राज तिलक) के योग्य नहीं होता अभिषेक की अयोग्यता से इसे गोज (गोल) कहते हैं ॥ २९ ॥ सब प्रकार से राजा के चरणों की वंदना (नमस्कार) श्रेष्ठ है और यह गोज राजाओं के पुनर्भू करण (द्वितीय विवाह करने) में राजा के समान है अर्थात् इस के यहां राजा द्वितीय विवाह करले ॥ ३० ॥ विधि से विवाही वैश्य कन्या में जो ब्राह्मण से हो वह अंबष्ठ कहलाता है खेती अथवा आग्नेय (लकड़ी) उस की जीविका होती है ॥ ३१ ॥ सेना की अथवा शस्त्र की जीविका अंबष्ठों की है—और वैश्य की कन्या में जो चोरी से ब्राह्मण से पैदा हो उसे कुंभकार (कुम्हार) कहते हैं ॥ ३२ ॥ यह कुलाल की वृत्ति (मट्टी के पात्र बनाने) से जीवे