भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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औशनसस्मृतिः ॥ ९

मणीनांराजतांकुर्यान्मुक्तानांवेधनक्रियाम् ॥ ३९ ॥ प्रवालानांचसूत्रित्वं शाखानांवलयक्रियाम् । शूद्रस्यविप्रसंसर्गाज्जातउग्रइतिस्मृतः ॥ ४० ॥ नृपस्यदंडधारःस्यादृढंदंड्येषुसंचरेत् । तस्यैवचौर्य्यसंवृत्या जातःशुण्डिकउच्यते ॥ ४१ ॥ जातदुष्टान्समारोप्य शुंडाकर्मणियोजयेत् । शूद्रायांवैश्यसंसर्गाद्विधिनासूचिकःस्मृतः ॥ ४२ ॥ सचक्राद्विप्रकन्यायां जातस्तक्षकउच्यते । शिल्पकर्माणिचान्यानिप्रासादलक्षणंतथा ॥ ४३ ॥ नृपायामेवतस्यैव जातोयोमत्स्यबंधकः । शूद्रायांवैश्यतश्चौर्यात्कटककारइतिस्मृतः ॥ ४४ ॥ वशिष्ठशापात्त्रेतायां केचित्पारशवारतथा ।


होता है मणियों का रंगना वा मोतियों का बींधना इस का काम है ॥३९॥ अथवा मूंगों की माला वा कड़े बनाना इसका काम है शूद्र के घर ब्राह्मण के संसर्ग से जो पैदा हो वह उग्र कहाता है ॥ ४०॥ यह राजा का दंडधार होता है और दंड के योग्यों को दंड देता है और जो ब्राह्मण से शूद्री में चोरी से हो उसे शुंडिक कहते हैं ॥ ४१ ॥ जन्मते ही दुष्टों के ऊपर अधिपति बना-कर उस शुंडी को शुंडा कर्म ( सूली देना ) में राजा नियुक्त करे विधि से विवाही शूद्र कन्या में जो वैश्य से पैदा हो उसे सूचिक ( दरजी ) कहते हैं॥४२ सूचिक से ब्राह्मण की कन्या में जो पैदा हो उसे तक्षक (बढ़ई) कहते हैं शिल्प कर्म ( कारीगरी ) वा प्रासाद लक्षण ( मकान बनाने का प्रकार ) काम को करता है ॥ ४३ ॥ क्षत्रिय की कन्या में जो सूचिक से पैदा हो वह मत्स्यबंधक ( धीवर ) होता है शूद्र की कन्या में चोरी से जो वैश्य से पैदा हो वह कटकार कहाता है ॥ ४४ ॥ त्रेतायुग में वशिष्ठजी के शाप से भी कोई एक पार-