अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें८ भाषार्थसहिता ४
वैखानसेनकेचित्तु केचिद्भागवतेनच ॥ ४५ ॥
वेदशास्त्रावलम्बास्ते भविष्यंतिकलीयगे ॥
कटकारास्ततः पश्चान्नारायणगणाः स्मृताः ॥ ४६ ॥
शाखावैखानसेनोक्तातंत्रमार्गविधिक्रियाः ।
निषेकाद्याःश्मशानांताः क्रियाःपूजांगसूचिकाः ॥४७॥
पंचरात्रेणवाप्राप्तं प्रोक्तंधर्मं समाचरेत् ।
शूद्रादेव तुशूद्रायां जातः शूद्रइतिस्मृतः ॥४८॥
द्विजशुश्रूषणपरः पाकयज्ञपरान्वितः ।
सच्छूद्रंतंविजानीयादसच्छूद्रस्ततोऽन्यथा ॥४९॥
चौर्यात्काकवचोज्ञेयश्चाश्वानांतृणवाहकः ।
एतत्सक्षेपतःप्रोक्तं जातिवृत्तिविभागशः ॥५०॥
जान्त्यन्तराणिदृश्यन्ते सङ्कल्पादितएवतु ॥ ५१ ॥
इत्यौशनसं धर्मशास्त्रं समाप्तम् ॥
शय होते हैं वे वैखानस (हरिकाराना) से अथवा परमेश्वर की भक्ति से॥४५॥ वे शापवाले पारशव कलियुग में वेदशास्त्र के जानने वाले होंगे तिस के पीछे वे कटकारानाम के नारायण के गण कहायेंगे ॥४६॥ तंत्रमार्गके विधान से कर्म जिनमें है ऐसी शाखा वैखानस ऋषि ने कही है और गर्भ से लेकर श्मशानतक १६ संस्कार भी इन के होते हैं इसीसे ये सूचिक पूज्य (श्रेष्ठ) हैं ॥ ४७ ॥ नारद पंचरात्र में कहे हुए धर्म को ये करें—शूद्र की कन्या में शूद्रसे शूद्रही होता है ॥४८॥ जो शूद्र द्विज (तीनवर्ण) की सेवा में पाकयज्ञ के कर्म में सावधानरहे उस शूद्र को उत्तम शूद्र जानो और जो न रहे उसे असत् (निंदाकेयोग्य) जानना ॥४९॥ शूद्रकी कन्या में चोरी से जो शूद्रसे पैदा हो वह घोड़ोंका घास लानेहारा तृणवाहक काकवच कहाता है—यह संक्षेप से जाति और जीविका के अनुसार भिन्न २ हमने कहा ॥ ५०॥ मनुके संकल्प से इनमें से ही और २ जातिभी दीखती हैं ॥ ५१ ॥
इत्यौशनशं धर्मशास्त्रं समाप्तम्