अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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अष्टादशस्मृतिसूचीपत्रम् ॥ ९
| संख्या | विषयाः | स्मृतिनाम | पृ० |
|---|---|---|---|
| २४० | वार्धुषिकादीनामभक्ष्यमन्नादि । | वसिष्ठस्मृतौ | १० |
| २४१ | पात्रापात्रविवेकः । | ,, | १२ |
| २४२ | आततायिब्राह्मणस्यापि वधे न दोषः | ,, | १४ |
| २४३ | पङ्क्तिपावना ब्राह्मणाः । | ,, | १५ |
| २४४ | ब्राह्मणवैश्ययोःशस्त्रग्रहणावसरः । | ,, | १७ |
| २४५ | आचमनविधिः । शुद्धाशुद्धिविवेकश्च । | ,, | १७ |
| २४६ | द्रव्यशुद्धिविचारः । | ,, | १८ |
| २४७ | चातुर्वर्ण्योत्पत्तिः । | ,, | २० |
| २४८ | अन्त्येष्टिविधिर्मरणसूतक शुद्धिश्च । | ,, | २१ |
| २४९ | स्त्रीणां धर्मविचारः । | ,, | २४ |
| २५० | आचारस्य प्रशंसा व्याख्यानं च । | ,, | ३१ |
| २५१ | ब्रह्मचारिधर्मः । | ,, | ३२ |
| २५२ | गृहस्थधर्मेऽतिथिपूजनं विशिष्टम् । | ,, | ३३ |
| २५३ | वानप्रस्थाश्रमिणः कर्तव्यम् । | ,, | ३५ |
| २५४ | संन्यासधर्म विषयः । | ,, | ३६ |
| २५५ | अतिथि सेवाप्रकारः । | ,, | ३८ |
| २५६ | पितृश्राद्ध विषयः । | ,, | ४१ |
| २५७ | ब्राह्मणादिब्रह्मचारिणां दण्डादिभेदाः | ,, | ४५ |
| २५८ | स्नातक व्रतानि । | ,, | ४७ |
| २५९ | उपाकर्म वेदानध्यायाश्च | ,, | ४९ |
| २६० | गुर्वादिसाम्मान्यानामभिवादनादिनामान्यम् । | ,, | ५३ |
| २६१ | भक्ष्याभक्ष्यवर्णनम् । | ,, | ५५ |
| २६२ | दत्तकपुत्रग्रहण विधिस्तद्दायभागश्च । | ,, | ६० |
| २६३ | राजधर्मस्य व्याख्यानं साक्षिणश्च । | ,, | ६२ |
| २६४ | पुत्रप्रशंसा द्वादशपुत्रव्याख्यानं तद्दायभागविचारश्च । | ,, | ६६ |
| २६५ | नियोग विषयः । | ,, | ७१ |
| २६६ | ऋतुकालात्पूर्वं कन्योद्वाहोऽन्यथापापित्वम् । | ,, | ७२ |
| २६७ | पत्युर्विदेशगमने स्त्रियाः कर्तव्यम् । | ,, | ७४ |
| २६८ | अदायादस्य धनादिकं केनादेयमिति विचारः | ,, | ७५ |