अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 172, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंयमस्मृतिः ॥ १५
संध्ययोरप्युभाभ्यांच पवित्रंसर्वदाजलम् ॥९४ ॥
स्वभावयुक्तमव्याप्त ममेध्येनसदाशुचिः ।
भांडस्थं धरणीस्थंवा पवित्रंसर्वदाजलम् ॥९५॥
देवतानांपितॄणांच जलेदद्याज्जलांजलीन् ।
असंस्कृतप्रमीतानां स्थलेदद्याज्जलांजलीन् ॥९६ ॥
श्राद्धे हवनकालेच दद्यादेकेनपाणिना ।
उभाभ्यांतर्पणेदद्या-दितिधर्मोव्यवस्थितः ॥ ९७ ॥
इतियमप्रणीतं धर्मशास्त्रं समाप्तम्
पवित्र है ॥ ९४ ॥ अपवित्र वस्तु जिस में न मिली हो ऐसा स्वाभाविक जल सदा पवित्र है पात्र का हो अथवा भूमि पर का हो जल सदा पवित्र है॥९५॥
देवता और पितरों को तो जल में जल की अंजली दे और जो संस्कार (यज्ञोपवीत) से पूर्व ही मरगये हैं उन को स्थल में दे ॥९६ ॥
श्राद्ध और होम के समय एक हाथ से अंजली दे और तर्पण में दोनों हाथों से यह धर्म की व्यवस्था है ॥ ९७ ॥
इति यमप्रणीते धर्मशास्त्रे भाषार्थः समाप्तः ॥