भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 805 में से

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॥ आपस्तम्बस्मृतिः ॥ १७

त्रिरात्रोपोषिताभूत्वा पञ्चगव्येनशुद्ध्यति ॥७॥
प्रथमेऽहनिषड्रात्रं द्वितीयेतुत्र्यहंस्तथा ।
तृतीयेचोपवासस्तु-चतुर्थेवह्निदर्शनात् ॥८॥
विवाहेविततेयज्ञे संस्कारेनकृतेतथा ।
रजस्वलाभवेत्कन्या संस्कारस्तुकथंभवेत् ॥९॥
स्नापयित्वातदाकन्या-मन्यैर्वस्त्रैरलंकृताम् ।
पुनर्मेध्याहुतिंहुत्वा शेषंकर्मसमाचरेत् ॥१०॥
रजस्वलातुसंस्पृष्टा प्लवकुक्कुटवायसैः ।
सात्रिरात्रोपवासेन पञ्चगव्येनशुद्ध्यति ॥११॥
रजस्वलातुयानारी अन्योन्यं-स्पृशतेयदि ।
तावत्तिष्ठेन्निराहारा स्नात्वाकालेनशुद्ध्यति ॥१२॥
उच्छिष्टेनतुसंस्पृष्टा कदाचित्स्त्रीरजस्वला ।
कृच्छ्रेणशुद्ध्यतेविप्रा शूद्रादानेनशुद्ध्यति ॥१३॥


पीने से शुद्ध होती है ॥ ७ ॥ रजस्वला स्त्री रजोदर्शन के प्रथम दिन अंत्यज आदि स्त्री का स्पर्श कर ले तो छः दिन, दूसरे दिन छुवे तो तीन दिन, तीसरे दिन स्पर्श करले तो एक दिन, उपवास करे और यदि चौथे दिन छूले तो अग्नि के देखने से शुद्ध होती है ॥ ८ ॥ विवाह में यज्ञ हो रहा हो और कुछ संस्कार भी हो चुका हो बीच में ही यदि वह कन्या रजस्वला हो जाय तो शेष संस्कार कैसे हो ॥ ९ ॥ उस समय कन्या को स्नान कराकर अन्य वस्त्रों से शोभायमान करे और फिर पवित्र आहुति देकर शेष कर्म को करे ॥ १० ॥ जिस रजस्वला को बानर-मुरगा कौआ छूवें तो वह तीन, दिन उपवास करने और पंचगव्य पीने से शुद्ध होती है ॥११॥ यदि दो रजस्वला स्त्री परस्पर एक दूसरी को छूवें तो शुद्धि के दिन तक उपवासी रह कर स्नान से शुद्ध होती हैं ॥ १२ ॥ यदि कदाचित् रजस्वला स्त्री को कोई उच्छिष्ट पुरुष स्पर्श करले तो ब्राह्मणी स्त्री कृच्छ्र व्रत करने से और शूद्र जाति की स्त्री दानसे शुद्ध होती है ॥१३॥

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