भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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अथाष्टादशस्मृति प्रस्तावः ॥

यद्यपि स्मृतियों के विषय में जो २ विचार वा संशोधन जिस २ प्रकार का अपेक्षित है वह ठीक २ हम ने अभी तक नहीं कर पाया है। क्योंकि ठीक २ शुद्ध पुस्तकादि साधन प्राप्त नहीं हुए। तथापि न होने से फिर भी बहुत कुछ अच्छा हुआ है। हम इस प्रस्तावना में संक्षेप से कुछ विचार दिखाते हैं जिन को पुस्तकों के अवलोकन से पहिले पाठक लोग बड़ी सावधानी से पढ़ के ध्यान में रख लेवे तब स्मृतियों को देखने से अवश्य कुछ लाभ होगा कल्याण का मार्ग भी देख पड़ेगा । याज्ञवल्क्य० अ० १ । ३ ।

पुराणन्यायमीमांसा धर्मशास्त्राङ्गमिश्रिताः । वेदाःस्थानानि विद्यानां धर्मस्य च चतुर्दश ॥ ३ ॥

अ०- ( १-पुराण ) ब्रह्मवैवर्त्तादि अठारह पुराण जिन के ( सृष्टि रचना, प्रलय, वंश, मन्वन्तर, और वंशों के चरित वर्णन ये ) पांच विषय हैं। (२-न्याय ) न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, ये चारो एक २ प्रकार से अपने २ उद्दिष्ट विषय का न्याय नाम निर्णय ( फैसला ) करने वाले होने से न्याय पद वाच्य हो सकते हैं। ( ३-मीमांसा ) धर्म का विचार करने के लिये पूर्व मीमांसा, और साक्षात सच्चिदानन्द स्वरूप ब्रह्मतत्त्व का निश्चय करने के लिये उत्तर मीमांसा ( वेदान्त दर्शन ) ये दोनों मीमांसा पद वाच्य हैं। (४-धर्म शास्त्र ) मनुआदि बीशस्मृति ( धर्मशास्त्रं तु वै स्मृतिः) इस मनुजी के कथनानुसार स्मृति और धर्मशास्त्र एक ही हैं। ( ५-अङ्ग ) वेद के छः अङ्ग हैं ( शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष, ) ये छः ( ६-चार वेद ) ऋग्यजुः साम अथर्व ये सब चौदह, विद्या और धर्म के स्थाने हैं। इन चतुर्दश प्रकार की विद्या से धर्म जाना जाता है। चार वेद, छः वेदाङ्ग, पुराण, न्याय, मीमांसा, धर्मशास्त्र ये सब चौदह होते हैं। ये ही चौदह विद्या हैं। महाभारत आदि इतिहास का विषय वही है कि जो पुराणों का है इस कारण पुराणके अन्तर्गत इतिहास भी आजाते हैं। वाल्मीकीय रामायण और महाभारत ये दो इतिहास मुख्य हैं। तुलसीदास की रामायण वाल्मीकीय की