भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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९८ भाषार्थसंहिता ॥

अनूदकेष्वरण्येषु चोरव्याघ्राकुलेपथि ॥ ३५ ॥ कृत्वामूत्रंपुरीषंच द्रव्यहस्तःकथंशुचिः । भूमावन्नंप्रतिष्ठाप्य कृत्वाशौचंयथार्थतः ॥ ३६॥ उत्संगेगृह्यपक्वान्न-मुपस्पृश्यततःशुचिः । मूत्रोच्चारंद्विजःकृत्वा अकृत्वाशौचमात्मनः ॥ ३७ ॥ मोहाद्भुक्त्वात्रिरात्रंतु गव्यंपीत्वाविशुद्ध्यति । उदक्यांयदिगच्छेत्तु ब्राह्मणोमदमोहितः ॥ ३८ ॥ चांद्रायणेनशुद्ध्येत ब्राह्मणानांचभोजनैः । भुक्त्वाच्छिष्टस्त्वनाचांत-श्चांडालैःश्वपचेनवा ॥३९॥ प्रमादाद्यदिसंसृष्टो ब्राह्मणोज्ञानदुर्बलः । स्नात्वात्रिषवणंनित्यं ब्रह्मचारीधराशयः ॥ ४० ॥ सत्रिरात्रोषितोभूत्वा पंचगव्येनशुद्ध्यति । चांडालेनतुसंसृष्टो यश्चापःपिबतिद्विजः ॥ ४१ ॥ अहोरात्रोषितोभूत्वा त्रिषवणेनशुद्ध्यति ।

वनों में चोर और बाघ सिंह जिस में हों ऐसे मार्ग में॥३५॥ मल और मूत्र कर के द्रव्य [भोजन आदि] जिस के हाथ मेंहों ऐसा पुरुष कैसे शुद्ध हो।पृथिवी पर अन्न को रखकर और यथार्थ शुद्धि करके ॥३६॥ उत्संग (गोदी) में पक्वान्नको ले-कर आचमन करके शुद्ध होता है। जो द्विज मूत्र विष्ठा करके शरीर शुद्धि किये बिना ॥ ३७ ॥ अज्ञान से खाले वह तीन दिन पंचगव्य पीकर सम्यक् प्रकार शुद्ध होता है। यदि काम से मोह को प्राप्त हुआ ब्राह्मण रजस्वला स्त्री के संग गमन करे ॥३८॥ तो चांद्रायण व्रत और ब्राह्मणों को भोजन करानेसे शुद्ध होता है—भोजन से उच्छिष्ट तथा कुल्ला आचमनसे पूर्व चांडाल और श्वपच॥३९॥ यदि अज्ञानी ब्राह्मणको प्रमादसे स्पर्श करलें तो त्रिकालस्नान करे ब्रह्मचारी रहे पृथिवी पर सोवे ४०॥ तीन दिन उपवास करें मय पंचगव्य पीने से शुद्ध होता है । चांडालके स्पर्श करने पर जो ब्राह्मण जल पीता है ॥४१॥ वह एक दिन रात उपवास और