अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 205, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें| ६२ | भाषार्थसहितः ॥ |
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तस्यशुद्धिर्विधातव्या नान्याचांद्रायणादृते ॥ १४ ॥
विवाहोत्सवयज्ञेषु अंतरामृतसूतके ।
सद्यःशुद्धिर्विजानीया-त्पूर्वसंकल्पितंचतत् ॥ १५ ॥
देवद्रोण्यांविवाहेच यज्ञेषुप्रततेषुच ।
कल्पितंसिद्धमन्नाद्यं नाशौचंमृतसूतके ॥ १६ ॥
इत्यापस्तम्बीये धर्मशास्त्रे दशमोऽध्यायः ॥ १० ॥
समाप्तेयं स्मृतिः
हत्या वाला है उसकी शुद्धि चान्द्रायण व्रत के बिना नहीं होती ॥ १४ ॥ विवाह-उत्सव और यज्ञ में यदि मरण यद्वा जन्म मृतक हो जावे तो उसीकाल में शुद्धि होती है क्योंकि वह पूर्व संकल्प किया है ॥ १५ ॥ देव द्रोणी (तीर्थ वा ध्वज) विवाह तथा बड़े यज्ञों में मरण और जन्म के मृतक में बनाहुआ सिद्ध अन्न (पक्वान्न आदि) अशुद्ध नहीं होता ॥ १६ ॥
इत्यापस्तम्बीये दशमोऽध्यायः समाप्तः ॥
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