भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 805 में से

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४ भाषार्थसंहिता-

क्षत्रियस्यापियजनं दानमध्ययनंतपः । शस्त्रोपजीवनंभूत रक्षणंचेतिवृत्तयः ॥ १४ ॥ दानमध्ययनंवार्ता यजनंचेतिवैविशः * । शूद्रस्यवार्ताशुश्रूषा द्विजानांकारुकर्मच ॥ १५ ॥ तदेतत्कर्माभिहितं संस्थितायत्रवर्णिनः । बहुमानमिहप्राप्य प्रयान्तिपरमांगतिम ॥ १६ ॥ येव्यपेताःस्वधर्मात्ते परधर्मेव्यवस्थिताः । तेषांशास्तिकरोराजा स्वर्गलोकेमहीयते ॥ १७ ॥ आत्मीयेसंस्थितोधर्मे शूद्रोपिस्वर्गमश्नुते । परधर्मोभवेत्त्याज्यः सुरुपपरदारवत् ॥ १८ ॥

भा०-यज्ञ करना, दान देना, साङ्गवेद पढ़ना और तप करना, ये क्षत्री के कर्म हैं और शस्त्रसे आजीविका और भूतों की रक्षा ये दो धर्मानुकूल क्षत्रियकी जीविका हैं ॥१४॥ दान देना, साङ्गवेद पढ़ना, खेती गौओं की रक्षा, व्यवहार, यज्ञ करना, ये वैश्यके कर्म हैं खेती, गौओंकीरक्षा, व्यवहार, तीनों वर्णों की सेवा, और कारीगरी, ये शूद्र के कर्म हैं॥१५॥ जिस कर्म में तत्पर रहने से चारों वर्ण इहलोक में बड़े मान को प्राप्त होकर परलोक में परमगति को प्राप्त होते हैं सो यह वर्णकर्म हमने कहा ॥१६॥ जो अपने धर्म को छोड़ के दूसरे के धर्म में तत्पर होते हैं उन को शिक्षा देने वाला राजा स्वर्गलोक में पूजा को प्राप्त होता है ॥१७॥ अपने धर्म में तत्पर हुआ शूद्र भीस्वर्ग को भोगता है और पराया धर्म इस प्रकार त्यागने योग्य है किजैसे श्रेष्ठरूप वाली पराई स्त्री ॥ १८ ॥

(१८) जैसे विष में पैदा हुआ कीड़ा विषसे मरतानहीं किन्तु विष ही उस का रक्षक होता है । इसी के अनुसार अपने २ बाप दादों की परम्परा से जो २ धर्म जिस वर्ण के अनुसार चला आता है उसी को अपना प्राकृत धर्म कर्म मानकर मनुष्यों को सेवन करना चाहिये । प्रत्येक मनुष्य का प्रयोजन सर्वोत्कृष्ट सुख स्वर्ग प्राप्त करने का है सो जब शूद्रादि को स्वधर्म के सेवन से स्वर्ग और पराये उत्तम धर्म से भी नरक होना सिद्ध है तब किसी को भी भयदायकपरधर्म का सेवन न करना चाहिये ॥ * विचार्यमत्र ॥

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