भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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संवर्त्तस्मृतिः ॥ ३५

तत्सर्वंनाशमायाति प्राणायामप्रभावतः ॥२२८॥ ऋग्वेद मभ्यसेद्यस्तु यजुःशाखामथापिवा । सामानिसरहस्यानि सर्वपापैःप्रमुच्यते ॥२२९॥ पावमानींतथाकौत्सीं पुरुषंसूक्तमेवच । जप्त्वापापैःप्रमुच्येत सपित्र्यंमाधुच्छंदसम् ॥२३०॥ मंडलंब्राह्मणंरुद्र सूक्तोक्तांश्चबृहत्कथाः । वामदेव्यंबृहत्साम जप्त्वापापैःप्रमुच्यते ॥ २३१ ॥ चांद्रायणंतुसर्वेषां पापानांपावनंपरम् । कृत्वाशुद्धिमवाप्नोति परमंस्थानमेवच ॥२३२॥ धर्मशास्त्रमिदंपुण्यं संवर्त्तेनतुभाषितम् । अधीत्यब्राह्मणोगच्छेद्व्रह्मणःसद्मशाश्वतम् ॥२३३॥ इति संवर्त्तप्रणीतं धर्मशास्त्रं समाप्तम् ॥

वह सब प्राणायाम के प्रभाव से नष्ट हो जाता है ॥ २२८ ॥ ऋग्वेद यजुर्वेद की शाखा और उपनिषद् भाग सहित सामवेद इन का अभ्यास (पाठ) करके मनुष्य सब पापों से मुक्त होता है ॥ २२९ ॥ ऋग्वेद के नवम मण्डल के आरम्भ के पवमान सूक्त हैं उन पावमानी, कुत्सऋषि वाले (अपनः शोशुचदघ०) इत्यादि । ऋ० १।९।५ सूक्त (सहस्र शीर्षा०) इत्यादि पुरुष सूक्त पितृ देवता तथा मधुछन्दो ऋषि वाले मंत्र इनको जप कर सब पापों से छूटता है ॥ २३० ॥ मण्डल ब्राह्मण ( शतपथ कां० १०। अ ५। ब्रा०२ रुद्र सूक्त के विस्तृत कथन, वामदेव्य साम और बृहत्साम वेद इनको जप के भी पापों से छूटता है ॥ २३१ ॥ परन्तु सब प्रायश्चित्तों में चान्द्रायण व्रत परम उत्तम है उसको करके शुद्ध हुआ उत्तम लोक को प्राप्त होता है ॥ २३२ ॥ संवर्त्त ऋषि के कहे इस पवित्र धर्म शास्त्र को ब्राह्मण पढ़ और जान तदनुसार चलकर सनातन ब्रह्मलोक में जाता है ॥ २३३ ॥

इति संवर्त प्रणीतं धर्मशास्त्रं समाप्तम् ॥ ८ ॥