अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 261, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें२७ | भाषावेमसंहिता ॥
नांगुष्ठादधिकाग्राह्या समिथ्स्थूलतयाक्वचित् ।
नवियुक्तात्वचाचैव नसकीटानपाटिता ॥ १९ ॥
प्रादेशान्नाधिकानोना नतथास्याद्विशाखिका ।
नसपर्णाननिर्वर्या होमेषुचविजानता ॥ १८ ॥
प्रादेशद्वयमिध्मस्य प्रमाणंपरिकीर्तितम् ।
एवंविधाःस्युरेवेह समिधःसर्वकर्मसु ॥ १९ ॥
समिधोऽष्टादशेध्मस्य प्रवदन्तिमनीषिणः ।
दर्शचपौर्णमासेच क्रियास्वन्यासुविंशतिः ॥ २० ॥
समिधादिषुहोमेषु मंत्रदैवतवर्जिता ।
पुरस्ताच्चोपरिष्टाच्च हीन्धनार्थंसमिद्भवेत् ॥ २१ ॥
इध्मोऽप्येंधार्थमाचार्यैर्हविराहुतिपुरस्कृतः ।
यत्रचास्यनिवृत्तिःस्यात्तत्स्पष्टीकरवाण्यहम् ॥ २२ ॥
जो अंगूठे से अधिक मोटी हो जिस के त्वचा (बक्कल) न हो जिस में कीड़े हों—और जो फटी हो ऐसी समिधा किसी होम में नहीं लेनी चाहिये ॥ १९ ॥
जो प्रादेश (अंगूठा और तर्जनी की लम्बाई प्रमाण) से अधिक लम्बी हो वा कम हो और जिसके शाखा (डाली) न हों—और जिसके पत्ते हों—और जो घूनी हो—ज्ञानवान् पुरुष होम में ऐसी समिधा न लेवे ॥ १८ ॥
दो एकप्रादेश होम में जलाने के इध्म का प्रमाण कहा है सब कर्मों में ऐसी ही समिधा होनी चाहिये ॥ १९ ॥
विद्वान् लोग दर्शपौर्णमास की इष्टियों में इध्मसञ्ज्ञक अठारह १८ समिधा कहते हैं जिन में पञ्चदश सामिधेनी की दो परिधि परिधान के अन्त में चढ़ाने की और एक अनुयाजों की ये १८ हुई और अन्य इष्टियों में सप्तदश सामिधेनी होने से बीश होती हैं ॥ २० ॥
जो होम समिधां से किये जाते हैं उन के पहिले अथवा पीछे ईंधन के लिये जो समिधा होती है उन का मंत्र और देवता कोई भी नहीं होता ॥ २१ ॥
एव (ईंधन) के लिये इध्म [अठारह समिध] को भी आचार्य कहते हैं कि वह तो पुरोडाशादि हव्य की आहुतियों में संनिहित है। और जिस कर्म में यह इध्म नहीं उस को हम स्पष्ट करेंगे ॥ २२ ॥