अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकात्यायनस्मृतिः ॥ २१
अंगहोमसमित्तन्त्र सोपन्त्याख्येषुकर्म्मसु ।
येषांचैतदुपर्युक्तं तेषुतत्सदृशेषुच ॥ २३ ॥
अक्षभंगादिबिपदि जलहोमादिकर्म्मणि ।
सोमाहुतिषुसर्वासुनैतेष्विध्मोविधीयते ॥ २४ ॥
इति कात्यायनस्मृतौ अष्टमः खण्डः ॥ ८ ॥
सूर्येऽन्तशैलमप्राप्ते षट्त्रिंशद्भिःसदांगुलैः ।
प्रादुष्करणमग्नीनां प्रातर्भासांचदर्शनात् ॥ १ ॥
हस्तादूर्ध्वंरविर्यावद् गिरिंहित्वानगच्छति ।
तावद्धोमविधिःपुण्यो नात्येत्युदितहोमिनाम् ॥ २ ॥
यावत्सम्यङ्नभाष्यंते नभस्यृक्षाणिसर्वतः ।
नचलौहित्यमापैति तावत्सायंचहूयते ॥ ३ ॥
रजोनीहारधूमाभ्रवृक्षाग्रान्तरितेरवौ ।
अंग होम ( बड़े यज्ञ में कर्नव्य छोटे यज्ञ में जो होता है ) समित्तन्त्र गर्भाधान आदि संस्कार—और जिन में पहिले कहा है उन में और उन के समान कर्म्म में ॥ २३ ॥ गाड़ी की धुरी टूट जाने आदि विपत्ति में जल के निमित्त जो होम तिस में और संपूर्ण सोम की आहुतियों में इध्म नहीं कहा है ॥ २४ ॥
यह आठवां खंड पूरा हुआ ॥८॥
जिस समय सूर्य्य अस्ताचल पर्वत से छत्तीस अंगुल ऊपर हों उस समय संध्या को और प्रातःकाल किरणों के दीखने पर अग्नियों को प्रज्वलित करे॥१॥ सूर्योदय हो जाने पर होम करने वालों का होमविधि तब तक भ्रष्ट नहीं होता जब तक उदयाचल से एक हाथ से ऊपर सूर्य न पहुंचे अर्थात् एक हाथ सूर्य्य के चढ़ने तक उदय काल ही रहता है यह विचार उदित होम करने वालों के लिये है ॥ २ ॥ जब तक सब आकाश में भले प्रकार नक्षत्र न दीखें और आकाश की लाली दूर न हो तब तक संध्या को होम कर सकता है ॥३॥ यदि धूली कोहरा धुआं-मेघ और वृक्ष-इन की