अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 271, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें| ३० | भाषार्थसहिता ॥ |
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र्य्यमणमग्निष्वात्तान् सोमपीथान् बर्हिषदोऽथस्वान् पितॄन्सकृत्सकृन्मातामहांश्चेतिप्रतिपुरुषमभ्यस्येज्ज्येष्ठभ्रात्- श्वशुरपितृव्यमांतुलांश्च पितृवंशमातृवंशीयेचान्येमत्तउद- कमर्हन्तितांस्तर्पयामीत्ययमवसानाञ्जलिरथ श्लोकाः ॥२॥ छायांयथेच्छेच्छरदातपार्त्तः पयःपिपासुःक्षुधितोऽलमन्नम् । बालोजनित्रींजननीचबालं योषित्पुमांसंपुरुषश्चयोषाम् ॥३॥ तथासर्वाणिभूतानि स्थावराणिचराणिच । विप्रादुदकमिच्छन्ति सर्वाभ्युदयकृद्धि सः ॥ ४॥ तस्मात्सदैवकर्त्तव्यमकुर्वन्महतेनसा । युज्यतेब्राह्मणःकुर्वन्विश्वमेतद्विभर्त्तिहि ॥ ५ ॥ अल्पत्वाद्वोमकालस्य बहुत्वात्स्नानकर्मणः । प्रातर्नतनुयात्स्नानं होमलोपोहिगर्हितः ॥ ६ ॥ इति कात्यायनस्मृतौ द्वादशः खण्डः ॥१२॥
अनल, सोम, यम, अर्यमा, अग्निष्वात्ता, सोमपीथ, बर्हिषद्, इस के अनन्तर, अपने पितरों का और मातामहों का एक २ बार तर्पण करे और प्रत्येक पितरों का नाम ले ज्येष्ठ भ्राता श्वशुर चाचा, मामा फिर पिता माता के वंश में जो मरे हों अथवा और जो मेरे से जल की इच्छा करते हैं उन को तृप्त करता हूं यह सब से पीछें अञ्जलि दे ॥ २ ॥ अब श्लोक कहते हैं जैसे घप से दुःखी हुआ मनुष्य छाया चाहता है प्यासा मनुष्य जल भूखा अन्न बालक माता को और माता बालक को स्त्री पुरुष को और पुरुष स्त्री को चाहता है ॥ ३ ॥ तिसी प्रकार स्थावर और जङ्गम सब प्राणी ब्राह्मण से जल चाहते हैं क्योंकि ब्राह्मण सब को सुख देने वाला है ॥ ४ ॥ इस से ब्राह्मण सदैव तर्पण करे जो नहीं करता वह बड़े पाप से युक्त होता है और जो ब्राह्मण नियम से तर्पण करता है वह जानो इस जगत् को पालता है ॥ ५ ॥ होम का समय थोड़ा है और स्नान का कृत्य बहुत इस से प्रातःकाल में स्ना विस्तार से न करे क्योंकि होम का लोप निन्दित है ॥ ६ ॥
यह बारह वां खंड पुरा हुआ ॥१२॥