अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१६ पराशरस्मृतिः ॥
तावत्तत्सूतकंगोत्रे चतुर्थपुरुषेणतु ।
दायाद्विच्छेदमाप्नोति पञ्चमोवात्मवंशजः ॥ १० ॥
चतुर्थेदशरात्रंस्यात्पण्णिशाःपुंसिपञ्चमे ।
षष्ठेचतुरहाच्छुद्धिः सप्तमेतुदिनत्रयम् ॥ ११ ॥
शृङ्ग्यङ्ग्निमरणेचैवदेशान्तरमृतेतथा ।
बालेप्रेतेचसंन्यस्ते सद्यःशौचंविधीयते ॥ १२ ॥
पञ्चभिःपुरुषैर्युक्ता अश्राद्धेयाःसगोत्रिणः ।
ततःषट्पुरुषाद्यन्न श्राद्धेभोज्याःसगोत्रिणः ॥ १३ ॥
दशरात्रेष्वतीतेषु त्रिरात्राच्छुद्धिरिष्यते ।
ततःसंवत्सरादूर्ध्वं सचैलंस्नानमाचरेत् ॥१४॥
देशान्तरमृतःकश्चित्सगोत्रःश्रूयतेयदि ।
नत्रिरात्रमहोरात्रं सद्यःस्नात्वाशुचिर्भवेत् ॥१५॥
आत्रिपक्षान्त्रिरात्रंस्यादाषण्मासाच्चपक्षिणी ।
अहःसंवत्सरादर्वाक्सद्यःशौचंविधीयते ॥ १६ ॥
उस गोत्र में चौथी पीढ़ी तक ही वह सूतक भी होता है क्योंकि अपने वंश का पांचवां पुरुष बांट हो जाने से पृथक् हो जाता है ॥१०॥ चतुर्थ पीढ़ी तक दश दिन पांचवीं पीढ़ी में छः दिन रात—छठी पीढ़ी में चार दिन और सातवीं पीढ़ी में तीन दिन में शुद्धि होती है ॥ ११ ॥ सींग वाले पशुओं से—वा अग्नि से मरने में वा देशान्तर के मरने में—बालक के मरने में और अपने कुटुम्बी संन्यासी के मरने में उसी समय शुद्धि हो जाती है ॥१२॥ पांच पुरुषों से युक्त सगोत्री पुरुष श्रद्धा करने योग्य नहीं हैं। परन्तु जिन में कोई सुपात्र छठा बाहरी हो ऐसे सगोत्री श्राद्ध में भोजन कराने योग्य माने जाते हैं ॥१३॥ दश दिन बीत जाने पर विदेश में सगोत्री का मरण सुने तो तीन दिन में शुद्धि और एक वर्ष बाद सुने तो तत्काल सचैल स्नान करने से शुद्धि होती है ॥१४॥ यदि देशान्तर में मरा सगोत्री सुना जाय तो न तीन दिन और न एक दिन रात अशौच माने किन्तु शीघ्र ही स्नान करने से तत्काल शुद्धि होती है ॥१५॥ डेढ़ महिने तक सुनने पर तीन दिन में शुद्धि, छः महीने में सुने तो एकदिन रात शुद्धि माने, वर्ष भर के भीतर सुने तो एक दिन मात्र में शुद्धि और पश्चात् वर्ष बीत जाने पर तत्काल शुद्धि कर लेवे ॥ १६ ॥