अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 381, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें५० पराशरस्मृतिः ॥
अकामकृतपापस्य प्रायश्चित्तंकथंभवेत् ॥ १ ॥ वेदवेदाङ्गविदुषां धर्मशास्त्रविजानताम् । स्वकर्मरतविप्राणां स्वकंपार्पंनिवेदयेत् ॥ २ ॥ अतऊर्ध्वंप्रवक्ष्यामि उपस्थानस्यलक्षणम् । उपस्थितोहिन्यायेन व्रतादेशनमर्हति ॥ ३ ॥ सद्योनिःसंशयेपापे नभुञ्जीतानुपस्थितः । भुञ्जानोवर्द्धयेत्पापं पर्षद्यत्रनविद्यते ॥ ४ ॥ संशयेतुनभोक्तव्यं यावत्कार्य्यविनिश्चयः । प्रमादस्तु नकर्त्तव्यो यथैवासंशयस्तथा ॥ ५ ॥ कृत्वापापंनगूहेत गृह्यमानंविवर्द्धते । स्वल्पंवाथप्रभूतंवा धर्मविद्भ्यो निवेदयेत् ॥ ६ ॥ तेहिपापकृतांवैद्या हन्तारश्चैवपाप्मनाम् । व्याधितस्ययथावैद्या बुद्धिमन्तोरुजापहाः ॥ ७ ॥ प्रायश्चित्तेसमुत्पन्ने हीमान्सत्यपरायणः ।
अनिच्छा से किये पाप का प्रायश्चित्त कैसे हो ? सो कहते हैं ॥१॥ वेद वेदाङ्ग और धर्मशास्त्र को जो जानते हों और जो अपने कर्म में तत्पर हों ऐसे ब्राह्मणों से अपना पाप निवेदन करे ॥ २ ॥ इस से आगे विद्वानों की सभा में उपस्थित (हाजिर) होने का स्वरूप कहते हैं क्योंकि जो न्याय से उपस्थित होता है वही व्रत के उपदेश योग्य है ॥ ३ ॥ यदि शीघ्र ही पाप का निश्चय हो जाय तो प्रायश्चित्त के लिये विद्वत्सभा में उपस्थित हुये बिना भोजन न करे। जहां सभा न हो वहां भी पहिले जो भोजन करता है वह पाप को बढ़ाता है ॥४॥ यदि संशय होय कि मुझ से अपराध हुआ है वानहीं ? तो कार्य के निश्चय तक भोजन न करे और अपराध के निश्चय करने में प्रमाद (भूल) भी न करे किन्तु जिस प्रकार सन्देह मिट जाय वैसा ही करे ॥ ५ ॥ पाप को करके कदापि न छिपाये, क्योंकि छिपाया हुआ पाप बढ़ता है—थोड़ा पाप हो वा बहुत हो उसे धर्म के ज्ञाताओं को निवेदन करके प्रायश्चित्त पूछे ॥ ६ ॥ क्योंकि वे ही लोग पाप करने वाले रोगियों के वैद्य हैं और पापों का नाश करने वाले हैं—जैसे कि बुद्धिमान् वैद्य रोगी के रोगको दूर करने वाले होते हैं ॥७॥ प्रायश्चित्त के समय, लज्जा युक्त हो सत्य धर्ममें तत्पर और बारंबार नम्रता कोमलता को धारण करने वाला क्षत्रिय वा वैश्य मनुष्य शुद्धि