भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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३४ शंखस्मृतिः ॥

ऊनाङ्गाअतिरिक्ताङ्गा ब्राह्मणाःपङ्क्तिदूषकाः ॥ २ ॥ गुरूणांप्रतिकूलाश्च वेदान्न्युत्सादिनश्चये । गुरूणांत्यागिनश्चैव ब्राह्मणाःपङ्क्तिदूषकाः ॥ ३ ॥ अनध्यायेष्वधीयानाः शौचाचारविवर्जिताः । शूद्रान्नरससंपुष्टा ब्राह्मणाःपङ्क्तिदूषकाः ॥ ४ ॥ षडङ्गवित्त्रिसुपर्णो बह्वृचोज्येष्ठसामगः । त्रिणाचिकेतःपञ्चाग्निर्ब्राह्मणाःपङ्क्तिपावनाः ॥५॥ ब्रह्मदेयानुसन्तानो ब्रह्मदेयाप्रदायकः । ब्रह्मदेयापतिर्यश्च ब्राह्मणःपङ्क्तिपावनः ॥ ६ ॥ ऋग्यजुःपारगायश्च साम्नांयश्चापिपारगः । अथर्वाङ्गिरसोऽध्येता ब्राह्मणःपङ्क्तिपावनः ॥ ७ ॥ नित्यंयोगरतोविद्वान् समलोष्टाश्मकाञ्चनः ।


अंग न्यूनाधिक हों, वे पंक्ति को दूषित करने वाले हैं ऐसे ब्राह्मणों को न जि- मावे ॥ २ ॥ गुरुओं के जो प्रतिकूल हों, वा जो वेद के अभ्यास तथा अग्निहोत्र के त्यागने वाले और जो गुरुओं को त्यागते हैं, वे भी पंक्ति के दूषक हैं ॥ ३ ॥ जो अनध्यायी में वेद को पढ़ते, जो शौच आचार से हीन और शूद्र के अन्न से बने रस से पुष्ट होंति, वे भी पंक्ति के दूषक हैं ॥ ४ ॥ वेद के छः अंगों ( शिक्षादि ) को जो जाने, त्रिसुपर्ण को जो जाने, ऋग्वेद जिस ने पढ़ा हो, या ज्येष्ठ ( बड़े ) सामगान को जो गावे, तीन वेद को जान कर नाचिकेत अग्नि में चयन यज्ञ करने वाला, पांच अग्नियों ( गार्हन्त्याऽऽहवनीय आदि ) में अग्निहोत्रादि करने वाला, ये सब ब्राह्मण पंक्ति के पावन ( पवित्र करने वाले ) हैं ॥ ५ ॥ जो ब्राह्मण कुल परम्परा से वेद को पढ़ता पढ़ाता हो, जो ब्राह्मणों को देने योग्य दान देता हो और जो अनेक ब्राह्मणों के देनेयोग्य पदार्थों को स्वयं अकेला ही न लेवे, वह पङ्क्ति पावन कहाता है ॥ ६ ॥ जो ऋग्वेद, यजुर्वेद, और सामवेद को पूरा २ जानता हो और आङ्गिरस अथर्व वेद को जिस ने पढ़ा हो, वह ब्राह्मण भी पङ्क्तिपावन है ॥७॥ जो विद्वान् नित्य योगाभ्यास में तत्पर हो, जो मट्टी, पत्थर और सुवर्ण को