अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 503, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ ३९
आम्रामलकीमिक्षुं मृद्वीकादधिदाडिमान् । विदार्य्यश्वत्थरम्भाद्यान्दद्याच्छ्राद्धेप्रयत्नतः ॥ २२ ॥ धानालाजेमधुपुने सक्तून्शर्करयासह । दद्याच्छ्राद्धेप्रयत्नेन शृङ्गाटकविसेतकान् ॥ २३ ॥ भोजयित्वाद्विजान्भक्त्या स्वाचान्तान्दत्तदक्षिणान् । अभिवाद्यपुनर्विप्राननुव्रज्याविसर्जयेत् ॥ २४ ॥ निमन्त्रितस्तुयःश्राद्धे मैथुनंसेवतेद्विजः । श्राद्धंदत्त्वाचभुक्त्वाच युक्तःस्यान्महत्तैनसा ॥ २५ ॥ कालशाकंमहाशल्कं मांसंवाधीणसस्यच । खड्गमांसंतदानन्तं यमःप्रोवाचधर्मवित् ॥ २६ ॥ यद्ददातिगयाक्षेत्रे प्रभासेपुष्करेत्तथा । प्रयागेनमिषारण्ये सर्वमानन्त्यमश्नुते ॥ २७ ॥ गङ्गायमुनयोस्तीरे पयोष्ण्याममरकण्टके ।
आम के फल आंवला गाड़ा, या गन्ना, वा पोड़ा, दाख, दही, अनार, विदारी कन्द, केला, इनको श्राद्ध में विशेष कर ब्राह्मणों को जिमावे ॥ २२ ॥ महत से मिले भुंजे जो और सांठों खांड मिल सत्तू, शृंगाटक (जल की कटहल्ली का फल) विसैतक (भिम) इनको श्राद्ध में विशेष कर देवे ॥ २३ ॥ ब्राह्मणों को भक्ति से भोजन करा कर किया है आचमन जिन्होंने ने और दी है दक्षिणा जिन को ऐसे ब्राह्मणों को फिर नमस्कार और अनु (पीछे २) दूर तक पधार के विसर्जन करे ॥ २४ ॥ जो श्राद्ध में न्योता हुआ ब्राह्मण मैथुन करे उसको जो श्राद्ध में जिमाये, वह और भोजन कराने वाला दोनो बड़े पाप से युक्त होते हैं ॥ २५ ॥ ऋतु का शाक, महाशल्क नामक मछली, वार्धाणस अधिक लम्बे कानोंवाले बकराका मांस, और गेंडा का मांस इन को यमराज ने श्राद्ध में अनन्त फल देने वाले कहा है ॥ २६ ॥ गया, प्रभास, पुष्कर, प्रयाग, नैमिषारण्य इन तीर्थों में जा कर जो पितरों का श्राद्ध करता है, वह अक्षय फलदायी है ॥ २७ ॥ गंगा, यमुना के तीर पर, पयोष्णी नदी पर, अमरकंटक, नर्मदा और गया के तीर पर इन में पिण्ड