भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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४८ शंखस्मृति ॥

संवत्सराद्धं कुर्वीत व्रतमेतत्समाहितः ॥ १६ ॥ तृणेक्षुकाष्ठतक्राणां रसानामपहारकः । मासमेकंव्रतं कुर्याद्गन्धानांसर्पिषांतथा ॥ १७ ॥ लवणानांगुडानांच मूलानांकुसुमस्यच । मासाद्धंतुव्रतं कुर्यादेतदेवसमाहितः ॥ १८ ॥ लोहानांवैदलानांच सूत्राणांचर्मणांतथा । एकरात्रंव्रतं कुर्यादेतदेवसमाहितः ॥ १९ ॥ भुक्त्वापलाण्डुलशुनं मद्यंचकवकानिच । नारंमलंतथामांसं विड्वराहंखरंतथा ॥ २० ॥ गौधेरकुञ्जरोष्ट्रंच सर्वंपञ्चनखंतथा । क्रव्यादंकुक्कुटंग्राम्यं कुर्यात्संवत्सरव्रतम् ॥ २१ ॥ भक्ष्याःपञ्चनखास्त्वेते गोधाकच्छपशल्लकः । खड्‌गश्चशशकश्चैव तान्हत्वाचाचरेद्व्रतम् ॥ २२ ॥ हंसंमद्गुंबकं काकं काकोलंखञ्जरीटकम् । मत्स्यादांश्चतथामत्स्यान्बलाक्रंशुकसारिके ॥ २३ ॥


की चोरी करके छः महीने तक सावधानी से उक्त व्रत करै ॥ १६ ॥ तृण, गांठ, काठ, मठा, रस, सुगन्ध, घी इन का चोर एक महीना तक व्रत करै ॥ १७ ॥ लवण, गुड़, मूल, फूल, इन की चोरी करने वाला सावधानी से पन्द्रह दिन यही व्रत करै ॥ १८ ॥ लोहे के पात्र बांस के पात्र, सूत, चाम, इन की चोरी करने वाला सावधान हो कर एकदिनरात यही व्रत करै ॥ १९ ॥ पलाण्डु, (प्याज) लहशुन, मदिरा, कवक (कटफल) मनुष्य का मल, मनुष्य का मांस विष्ठा खाने वाले सूकर और गधा का मांस इन को खा कर ॥ २० ॥ गोधेय (गोह का बच्चा) हाथी, ऊंट, सब पांच नखवाले, कच्चा मांस खाने वाले जीव, और गांव का मुरगा इन सब का मांस खा कर एक वर्ष तक उक्त व्रत करै ॥ २१ ॥ परन्तु गोह, कछुआ, सेही, गेंडा, खरगोश, ये पांच नखों वाले पांच भक्ष्य हैं और इन पांचों को मारकर भी एकवर्ष तक व्रत को करै ॥ २२ ॥ हंस-मद्गुर, (मत्स्यभेद या जलकाक) बगुला, बलाका, कौआ, काकोल, (सर्प) खञ्जरीट (खञ्जन पक्षि) मछलीको खानेवाली - मछली, तोता, सारिका (मैना,)॥ २३ ॥