अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 515, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाधर्मसंहिता ॥ ४९
चक्रवाकंप्रप्लवंकौकं मण्डूकंभुजगंतथा ।
मासमेकंव्रतंकुर्याद्धेनञ्चैवनभक्षयेत् ॥ २४ ॥
राजीवान्सिंहतुण्डांश्च शकुलांश्चतथैवच ।
पाठीनरोहितौभक्ष्यो मनुष्येषुपरिकीर्तितौ ॥ २५ ॥
जलेचरांश्चजलजान् मुखाग्रनखविष्किरान् ।
रक्तपादान्जालपादान्सप्ताहांतव्रतमाचरेत् ॥ २६ ॥
तित्तिरिंचमयूरंच लावकंचकपिञ्जलम् ।
वार्ध्रीणसंवर्त्तकंच भक्ष्यानाहयमस्तथा ॥ २७ ॥
भुक्त्वाचोभयतोदन्त मन्यैकशफदीर्घोर्णः ।
तथाभुक्त्वातुमांसांश्च मासाद्धैव्रतमाचरेत् ॥ २८ ॥
स्वयंमृतंष्टथामांसं माहिषंवाजमेवच ।
गौरचक्षीरंविवत्सायाः संधिन्थाश्चतथापयः ॥ २९ ॥
संधिन्यमेध्यमशित्वा पक्षंतुव्रतमाचरेत् ।
क्षीराणियान्यभक्ष्याणि तद्विकाराननेबुधः ॥ ३० ॥
सप्तरात्रंव्रतंकुर्याह्येतत्परिकीर्त्तितम् ।
चक्रवा, प्लव (जल का पंछी) कंक (बगुला) मेढक, सर्प इनको खाकर एक महीना तक व्रत करे और आगे इनको कभी न खावै ॥ २४ ॥ राजीव, सिंहतुंड, श-कुल, पाठीन, रोहित, इन२ नामों वाली मच्छी भक्ष्य कही हैं ॥ २५ ॥ जल में विचरने और जल में पैदा होने वाले, मुख के अग्रभाग में जो नख उनसे खोदने वाले जिनके पग लाल हों, और जिनके जाल के समान पग हों, उन पक्षियों का मांस खाकर सात दिन व्रत करे ॥ २६ ॥ तीतर, मोर, लावक (लावपंछी) कपिंजल, वा-र्ध्रीणस, बत्तक, ये यमराजने भक्ष्य कहे हैं ॥ २७ ॥ जिनके दोनों ओर दांत होते, जिनके एक जुड़े खुर होते, जो एक ओर दानवाले हैं इनका मांस खाकर पंद्रह दिन व्रत करे ॥ २८ ॥ स्वयं मरे जीवका मांस, भैंस और बकरेका मांस, जिस का बछड़ा मरगयाहो अथवा जो संधिनी (गाभिन हो जाने पर दूध देती हो) उस गौ का दूध ॥ २९ ॥ संधिनी गौ का अशुद्ध मूत्रादि इनको खाकर पंद्रह दिन व्रत करे और जो दूध अभक्ष्य हैं उनके विकार (दही, मट्ठा, कढ़ी आदि) को खाकर बुद्धिमान् पुरुष ॥ ३० ॥ सात दिन तक उक्त व्रतको करे। जिसका लाल गोंड़, और जो गोंड़ वृक्षके
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