अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 517, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ ५१
गणान्नंभूमिपालान्न मन्नंचैवम्प्रजीविनाम् ॥ ३९ ॥
मौञ्जिकानांसूतिका नं भुक्त्वामा संव्रतंचरेत् ।
शूद्रस्यसततं भुक्त्वा षण्मासान्व्रतमाचरेत् ॥ ४० ॥
वैश्यस्यतुतथाभुक्त्वा त्रीन्मासान्व्रतमाचरेत् ।
क्षत्रियस्यतथाभुक्त्वा द्वौमासौव्रतमाचरेत् ॥ ४१ ॥
ब्राह्मणस्यतथाभुक्त्वा मासमेकंव्रतंचरेत् ।
आपःसुराभाजनस्थाः पीत्वापक्षंव्रतंचरेत् ॥ ४२ ॥
मद्यभाण्डगताःपीत्वा सप्तरात्रंव्रतंचरेत् ।
शूद्रोच्छिष्टाशनेमासं पक्षमेकंतथाविशः ॥ ४३ ॥
क्षत्रियस्यतुसप्ताहं ब्राह्मणस्यतथादिनम् ।
अग्रश्राद्धाशनेविद्वान् मासमेकंव्रतीभवेत् ॥ ४४ ॥
परिवित्तिःपरिवेत्ता ययाचपरिविन्दति ।
व्रतंसंवत्सरंकुर्य्युर्दातृयाजकपञ्चमाः ॥ ४५ ॥
काकोच्छिष्टंगवाघ्रातं भुक्त्वापक्षंव्रतीभवेत् ।
का अन्न, बहुत मनुष्यों के चन्द का अन्न, राजा का अन्न शिकारी कुत्ते रखने वालों का अन्न, ॥३९॥ सूत के व्यापारी और सूतिका का अन्न खाकर एक मास तक व्रत करे और निरन्तर शूद्र के अन्न को खाकर छ मास तक व्रत करे ॥४०॥ वैश्यका अन्न निरन्तर खाकर तीन महीने और क्षत्रिय का अन्न निरन्तर खाकर दो महीने व्रत करे ॥ ४१ ॥ ब्राह्मणका अन्न निरन्तर खाकर एक महीने तक व्रत करे और मदिरा के पात्र में रक्खा जल पीकर पन्द्रह दिन तक व्रत करे । ४२॥ गुड़ की मदिरा के पात्र का जलपीकर सातदिन व्रत करे । शूद्रका उच्छिष्ट खाकर एक महीना और वैश्य का उच्छिष्ट खाकर पन्द्रह दिन व्रत करे ॥ ४३ ॥ क्षत्रिय का उच्छिष्ट अन्न खाकर सात दिन, ब्राह्मण का उच्छिष्ट अन्न खाकर एक दिन और अद्यादशाह के श्राद्ध में खाकर एक महीना ज्ञानवान् मनुष्य व्रत करे ॥ ४४ ॥ परिवेत्ता परिवित्ति जिस स्त्री के साथ परिवित्ति ने जेठे भाई से पहिले विवाह किया हो वह स्त्री कन्या का दाता और पांचवा याजक (विवाह पढ़ने वाला ) ये पांचों एक वर्ष तक व्रत करें ॥ ४५ ॥ कौवे का उच्छिष्ट, गौ का सूँघा अन्न इन को खाकर पंद्रह दिन व्रत करे और बाल कीड़ा, मूसा, हत इन में जो दूषित हो अर्थात बाल आदि पड़ गये हों